Share market kya hai? – शेयर मार्किट क्या है और कैसे काम करता है?

शेयर मार्किट एक ऐसा प्लेटफार्म है जो लोगो और संस्थाओं को एक कंपनी से शेयर्स खरीदने और बेचने का मौका देती है। आप सभी लोगो के शेयर मार्किट के बारे में लगभग रोजाना ही सुनने को मिलता होगा और ज्यादातर लोगो में यही भ्रान्ति है की शेयर मार्किट में पैसा लगाना एक जुआ है, और इस से सिर्फ पैसे की बर्बादी होती है। लोगो की शेयर मार्किट के बारे में यह सोच उनकी इन्वेस्टमेंट और फाइनेंशियल सेक्टर की जानकारी में कमी होने के कारण है। आज के इस आर्टिकल “Share market kya hai” के जरिए हम शेयर मार्किट की सभी बेसिक कांसेप्ट को जानेंगे जो आपको इन्वेस्टमेंट जगत में अपने सफर की शुरुआत करने में मदद करेगा।

Share market kya hai

शेयर मार्किट क्या है? – Share market kya hai?

शेयर मार्किट जिसे की स्टॉक मार्किट या इक्विटी मार्किट भी कहा जाता है, एक ऐसा बाजार है जहां पर लोग एक कंपनी के शेयर्स को खरीद और बेच सकते है। इस बाजार में ट्रेड होने वाली कंपनियों को पब्लिक ट्रेडेड कंपनी कहा जाता है जो शेयर मार्केट के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी आम लोगो को ऑफर करती है। जब आप किसी कंपनी के शेयर को मार्किट से खरीदते है तो आप उस कंपनी में एक हिस्सेदार बन जाते है। कंपनी की परफॉरमेंस के हिसाब से कंपनी के शेयर्स की वैल्यू कम और ज्यादा होती रहती और वैल्यू का यही बदलाव आपकी इन्वेस्टमेंट पे मुनाफे और नुक्सान कर कारण बनती है।

शेयर क्या होता है? – Share kya hota hai?

शेयर एक कंपनी की हिस्सेदारी के एक सिंगल यूनिट को कहा जाता है। उदाहरण के लिए एक कंपनी ने अपनी हिस्सेदारी को 1000 भागो में विभाजित किया और शेयर मार्किट में लिस्ट करवा दिया। इस मामले में हम यह कह सकते है की कंपनी के 1000 शेयर मार्किट में लिस्टेड है और अगर आप उन में से 100 शेयर भी खरीद ले तो आप उस कंपनी में 10% के हिस्सेदार बन जायेंगे। एक शेयरहोल्डर होने के नाते आपके कुछ अधिकार और फायदे होंगे जैसे की:

वोटिंग राइट – Voting right: जब भी कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर्स कंपनी के भविष्य और मैनेजमेंट से जुडी कोई जरुरी फैसला लेते है तो आपको उस फैसले के हक में या खिलाफ वोटिंग करने का अधिकार होगा।

डिविडेंड – Dividend: समय समय पर कंपनिया अपने प्रॉफिट का कुछ हिस्सा शेयरहोल्डर्स में उनकी इन्वेस्टमेंट के रिवॉर्ड के तौर पर बांटती है जिन्हे डिविडेंड कहा जाता है। एक शेयरहोल्डर होने के नाते आप भी इस डिविडेंड को पाने के हकदार होंगे जो आपकी पैसिव इनकम का एक अच्छा सोर्स बन सकता है।

कैपिटल ग्रोथ – Capital Growth: कोई भी कंपनी अपने क्षेत्र में अच्छा या बुरा किसी भी तरह का परफॉर्म कर सकती है। उसकी परफॉर्मेंस के हिसाब से बाजार में लिस्टेड उसके शेयर्स की वैल्यू बढ़ या घट सकती है। शेयर की वैल्यू के बढ़ने के केस में आपकी इन्वेस्टमेंट की वैल्यू में भी बढ़ोतरी होती है।

शेयर मार्किट के मुख्य भाग – Share market ke mukhya bhaag

शेयर मार्किट के मुख्य भागो को निचे दर्शाया गया है:

स्टॉक एक्सचेंज – Stock Exchange: जैसे की पहले ही बताया गया है की स्टॉक मार्किट एक बाजार की तरह है जहां पे शेयर्स की खरीद और बिक्री होती है। इस मार्किट को ऑपरेट करने के लिए एक जगह या एक प्लेटफार्म की जरुरत होती है जिसे स्टॉक एक्सचेंज कहा जाता है। वह सभी स्टॉक जो स्टॉक मार्किट में ट्रेड होते है स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होते है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) भारत के दो मुख्य एक्सचेंज है।

ब्रोकर्स – Broker: ब्रोकर वह लोग या institute होते है जो स्टॉक मार्किट और आम लोगो के बीच कड़ी का काम करते है। कोई भी व्यक्ति स्टॉक मार्किट में डायरेक्टली ट्रेड या इन्वेस्ट नहीं कर सकता। स्टॉक मार्किट में इन्वेस्टिंग करने के लिए उन्हें स्टॉक को स्टोर करने के लिए डीमैट अकाउंट खुलवाना पड़ता है और ऐसा सिर्फ ब्रोकर्स के द्वारा ही संभव है। भारत में कई ब्रोकर मौजूद है जिनमे फुल सर्विस ब्रोकर और डिस्काउंट ब्रोकर जैसे की zerodha, Groww आदि शामिल है।

मार्किट इंडेक्स – Market Index: स्टॉक मार्किट में हजारों कंपनिया लिस्टेड है। उनमें से हर कंपनी की मूवमेंट को रोज़ाना ट्रैक कर पाना लगभग नामुमकिन है। इसी लिए मार्किट इंडेक्स का निर्माण किया गया जिसमे सभी सेक्टर से टॉप कंपनिया शामिल होती है और जिनकी एवरेज मूव से हम सारी मार्किट की स्तिथि का अंदाजा लगा सकते है। निफ्टी 50 और सेंसेक्स भारत के मुख्य स्टॉक एक्सचेंज है। निफ्टी 50 NSE स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स है जिसमे टॉप के 25 स्टॉक शामिल है वही पर सेंसेक्स BSE का स्टॉक एक्सचेंज है और इसमें 50 टॉप स्टॉक शामिल है।

मार्किट रेगुलेटर – Market regulator: मार्किट रेगुलेटर वह संस्थाएं होती है जो को मार्किट की कार्यप्रणाली को ठीक ढंग से चलाए रखने के लिए नियम बनाती है और पूरी मार्किट पर नजर रखती है ताकि किसी पार्टी की गलत और इल्लीगल गतिविधि पर रोक लगाई जा सके और इन्वेस्टर्स की फ्रॉड से सुरक्षा की जा सके। भारत में SEBI(Securities and Exchange Board of India) स्टॉक मार्किट रेगुलेटर के तौर पर काम करता है।

ट्रेडर और इन्वेस्टर – Trader and Investor: ट्रेडर और इन्वेस्टर में मेरे और आप जैसे लोग आते है जो स्टॉक मार्किट में इन्वेस्ट और ट्रेड करके मुनाफा कमाना चाहते है।

शेयर मार्किट कैसे काम करती है? – Share market kaise kaam karti hai?

किसी भी कंपनी के शेयर को ट्रेड होने के लिए स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होना पड़ता है। कंपनी अपने शेयर्स को स्टॉक एक्सचेंज में IPO यानि की Initial Public Offer द्वारा लिस्ट करवा सकती है। IPO के दौरान कोई भी कंपनी अपने शेयर शेयर्स पहली बार आम लोगो की खरीद के लिए उपलब्ध करवाती है। IPO एक फिक्स्ड टाइम पीरियड के लिए खुला रहता है जिसके दौरान कंपनी के शेयर एक फिक्स्ड प्राइस पर खरीदे जा सकते है। इन्वेस्टर कंपनी द्वारा शेयर के फिक्स किए प्राइस पर बोली लगा सकते है। शेयर की जितनी ज्यादा डिमांड होगी शेयर का प्राइस उतने ही प्रीमियम के साथ लिस्ट होता है। IPO को लांच करने से पहले कंपनी को सभी जरुरी जानकारी जैसे की कंपनी के फाइनेंशियल, IPO का उद्देश्य और फ्यूचर ऑब्जेक्टिव आदि एक्सचेंज और सेबी को सबमिट कराने पड़ते है।

IPO के टाइम पीरियड खत्म हो जाने पर शेयर्स बिडर को अलॉट करने के साथ ही स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हो जाते है। स्टॉक एक्सचेंज में IPO के शेयर्स उसकी डिमांड और सप्लाई के कारण अपने इशू प्राइस से कम क्या ज्यादा प्राइस में लिस्ट होते है। शेयर लिस्ट होने से पहले IPO के दौरान वह जिस मार्किट में ट्रेड करते है उसे प्राइमरी मार्केट और शेयर्स के लिस्ट हो जाने के बाद वाली मार्किट को सेकंडरी मार्किट कहते है।

एक बार शेयर्स स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हो जाए तो कोई भी आम नागरिक उसमे ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग कर सकता है। शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने के लिए इन्वेस्टर के पास ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट होना चाहिए जिसे की वह किसी भी ब्रोकर के जरिए आसानी से खोल सकता है।

शेयर बाजार मे करोड़ो की संख्या में लोग ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग करते है। जब भी कोई ट्रेडर किसी शेयर को खरीदने के लिए Buy आर्डर डालता है तो वह ब्रोकर की आर्डर बुक और एक्सचेंज में चल रहे Sell आर्डर से मैच होने के लिए लिस्ट हो जाता है। जब उस buy आर्डर के अनुसार कोई sell आर्डर मिलता है तो ट्रांजेक्शन का लेनदेन होता है और शेयर, एक अकाउंट से डेबिट करके दूसरे अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाते है। हालांकि शेयर को पूरी तरह से डीमैट अकाउंट में सेटल होने के लिए 2 दिनों तक के समय लगता है।

बाजार में चलनी वाली इसी तरह की डिमांड और सप्लाई के कारण शेयर्स का प्राइस निरंतर बदलता रहता है। जब किसी शेयर के खरीददार ज्यादा और बेचने वाले कम हो तो शेयर का प्राइस बढ़ता है और जब शेयर के खरीददार कम और बेचनेवाले ज्यादा हो तो शेयर का प्राइस घटता है। शेयर के प्राइस के घटने बढ़ने के पीछे और भी कई कारण हो सकते है जैसे की इकनोमिक फैक्टर्स, मार्किट में चल यही न्यूज़, किसी बड़े इन्वेस्टर का शेयर में ट्रेंड करना आदि।

शेयर मार्किट में कैसे करे इन्वेस्ट – Share market me kaise kare invest?

जैसा की पहले ही बताया गया है एक आम आदमी के लिए शेयर मार्किट में इन्वेस्ट करने के लिए ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट की जरुरत होती है। ट्रेडिंग और डीमैट अकाउंट भारत के किसी भी ब्रोकर के द्वारा खोला जा सकता और दोनों ही सर्विसेज एक ही ब्रोकर देता करता है। किसी भी ब्रोकर के पास अकाउंट बहुत ही आसानी से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीको के खुलवाया जा सकता है। इसके लिए आपके पास अपना पैन कार्ड, एड्रेस प्रूफ और इनकम प्रूफ का होना जरुरी है। ट्रेडिंग अकाउंट में आपको एक प्लेटफार्म या application दी जाती है जिसमे आपके फण्ड स्टोर होते है। यहां से आप शेयर को ट्रैक कर सकते है और उन्हें खरदने और बेचने के लिए आर्डर लगा सकते है।

दूसरी और डीमैट अकाउंट भारत की दो संस्थाओं NSDL (National Securities Depository Limited) और CDSL (Central Depository Services (India) Limited।) में खुलवाया जा सकता है। यह वह एजेंसियां है जहा पर आपके शेयर स्टोर होते है। ब्रोकर के बदलने या बंद होने पर भी आपके शेयर सुरक्षित रहते है और डीमैट अकाउंट खुलवाने के लिए आपको कहीं और अलग से अप्लाई नहीं करना पड़ता। यह ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाते समय ब्रोकर ही आपको खुलवा के देता है।

शेयर मार्किट में क्यों करे इन्वेस्ट – Share market me kyu kare invest?

शेयर मार्किट कम समय में वेल्थ को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है। आम लोगो की नजरों में शेयर मार्किट एक जुआ हो सकता है या फिर वह इसे रिस्की समझ कर इस से दूर ही रहते है लेकिन इतिहास गवाह है की सिर्फ शेयर मार्किट में ही ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग करके सैंकड़ों लोगो करोड़ो रूपये कमाए है, और अगर सोच समझ और सीख कर शेयर मार्किट में काम किया जाए तो इस से अच्छा पैसा कमाने का और कोई तरीका नहीं हो सकता है। निचे कुछ कारण बताए गए है जिसके कारण किसी भी आम नागरिक को शेयर मार्किट में इन्वेस्ट जरूर करना चाहिए:

हाई रिटर्न – High return: पुरे विश्व में शेयर मार्किट ही एक ऐसा साधन है जो कुछ ही घंटो में आपकी कैपिटल को दुगुना तिगुना करने की क्षमता रखता है। हां, यह बात जरूर है की हाई रिटर्न के साथ साथ इसमें हाई रिस्क भी शामिल है, लेकिन अगर सोच समझ कर और अच्छी तरह एनालिसिस करके कोई भी इन्वेस्टिंग और ट्रेडिंग निर्णय लिया जाए तो रिस्क को काफी हद्द तक कम किया जा सकता है।

डाइवर्सिफिकेशन –  Diversification: डायवर्सिफिकेशन यानि की अपनी इन्वेस्टमेंट को एक से ज्यादा एसेट में बांटना ताकि रिस्क कम हो सके और रिटर्न बरकरार रहे। शेयर मार्किट डायवर्सिफिकेशन का अच्छा साधन है क्युकी आप कम रिस्क जैसे की FD, बांड, PPF आदि में इन्वेस्ट करने के साथ हाई रिटर्न और हाई रिस्क स्टॉक में इन्वेस्ट कर सकते है।

लिक्विडिटी – Liquidity: लिक्विडिटी यानि की आप कितनी आसानी से किसी एसेट को खरीद और बेच सकते है। जहां इन्वेस्टमेंट के अन्य साधनों जैसे FD, बांड प्रॉपर्टी आदि में इन्वेस्ट करने और पैसे निकालने के लिए फॉर्मेलिटी और ज्यादा दिन का समय लग जाता है वही शेयर मार्किट सबसे ज्यादा लिक्विडिटी इन्वेस्टमेंट ऑप्शन में से एक है। कामकाजी समय के दौरान शेयर मार्किट में हर समय ट्रेडिंग चलती रहती है, और आप कोई भी स्टॉक बिना किसी झंझट के पल में खरीद और बेच सकते है।

कंपनी में हिस्सेदारी – Partner in Company: जब भी आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते है तो खरीदी गई क्वांटिटी के मुताबिक आप कंपनी में हिस्सेदार बन जाते है। इस कारण आप की लगी कैपिटल पर कंपनी के घाटे में या मुनाफे में जाने का प्रभाव पड़ता है।

पैसिव इनकम – Passive income: वह लोग जो अपनी जॉब के साथ साथ ही पार्ट टाइम इनकम का कोई साधन खोज रहे है, वह वह शेयर मार्किट में ट्रेडिंग करके अच्छा पैसा बना सकते है। लेकिन यहां एक बात का ध्यान देना जरुरी है की है बिना सोचे विचारे लालच में लिया गया ट्रेड सिर्फ जुआ ही कहलायेगा। इसलिए मार्किट के बारे में जानने और सिखने के लिए समय दे, अपनी खुद की एनालिसिस करे और सोच समझ कर और रिस्क को ध्यान में रखकर ही किसी भी ट्रेड में कदम रखे।

यह भी जानिए: IPO Investment tips – IPO में इन्वेस्ट करते वक्त इन बातो का रखे ध्यान!

निष्कर्ष – Conclusion

शेयर मार्किट ग्लोबल मार्किट का एक जरुरी भाग है, जो इन्वेस्टर्स और कंपनी दोनों के लिए लाभदायक है। यह आम लोगो को उनकी वेल्थ को बढ़ाने और एक कंपनी का शेयरहोल्डर बनने का मौका देती है। लेकिन इस बात का ध्यान रखना भी जरुरी है की शेयर मार्किट में सफल होने के लिए रीसर्च, जानकारी और लॉन्ग टर्म थिंकिंग का होना बहुत जरुरी है। इन्वेस्टमेंट के हर एक माध्यम में किसी न किसी हद्द तक जोखिम शामिल होता है जिसे ध्यान में रखकर ही कोई भी उसमे पैसे लगाता है। उसी तरह शेयर मार्किट की रिटर्न तो हाई है लेकिन इसमें जोखिम भी उतना ही ज्यादा है। इसलिए पहले अपनी रिस्क लेने की क्षमता को जान ले और सारा पैसा सिर्फ इसी में इन्वेस्ट करने के बजाए कुछ पैसा लगाकर, धीरे धीरे सीखते हुए रकम को बढ़ाना शुरू कर सकते है।

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