IPO Investment tips – IPO में इन्वेस्ट करते वक्त इन बातो का रखे ध्यान!

IPO के जरिए एक कंपनी आम लोगो से अपने काम के लिए पैसा जुटाती है। कंपनी से साथ ही IPO आम लोगो के लिए कम समय में एक अच्छी रिटर्न कमाने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करता है। किसी भी IPO में इन्वेस्ट करने से पहले यह जरुरी है की उस कंपनी के बारे में अच्छी तरह से रिसर्च कर ली जाए और सोच समझ कर ही इन्वेस्टमेंट निर्णय लिया जाए। किसी भी IPO में इन्वेस्ट करने वक्त किन बातो का ध्यान रखना चाहिए वही हम आज इस ब्लॉग “IPO Investment tips” के जरिए जानेंगे।

IPO Investment tips

IPO क्या होता है? – IPO kya hota hai?

IPO का मतलब Initial Public Offering है। यह एक ऐसा प्रोसेस है जिसके जरिए एक निजी कंपनी पहली बार पर स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होती है और जनता को अपने शेयर पेश करती है। IPO में, कंपनी इक्विटी या फंड जुटाने के लिए नए शेयर जारी करती है या फिर जबकि मौजूदा शेयर धारक भी अपने शेयर बेच सकते हैं। जब शेयर स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हो जाते है तो उन्हें जनता द्वारा खरीदा और बेचा जा सकता है। IPO का उपयोग अक्सर कंपनियों द्वारा विकास या विस्तार योजनाओं के लिए पैसे जुटाने के तरीके के रूप में किया जाता है।

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IPO इन्वेस्टमेंट टिप्स – IPO Investment tips

IPO में इन्वेस्टमेंट संभावित रूप से अच्छी रिटर्न देने में सक्षम है, लेकिन इसमें रिस्क भी शामिल है। निचे बताए गए टिप्स आपको एक अच्छा इन्वेस्टमेंट निर्णय लेने और बेहतर IPO चुनने में मदद करेंगे।

रिस्क को समझना – Understand the risks: फंडामेंटल एनालिसिस का एक अहम भाग कंपनी जिस सेक्टर में काम कर रही है उस सेक्टर से जुड़े रिस्क को समझना होता है। ऐसे एनालिसिस में हम रेगुलेशन, कॉम्पिटिशन, मार्किट में विस्तार की संभावना जैसे फैक्टर, जिनसे कंपनी के काम काज पर असर पड़ सकता है, को ध्यान में रखते है। इसके इलावा IPO प्रोसेस में फॉलो किए जा रहे स्टेप्स और उसमे हो रही इनसाइडर ट्रेडिंग के बारे में जानकारी जुटाना भी ठीक रहता है। किसी कंपनी के फंडामेंटल को एनालाइज करने के लिए आप इस साइट का प्रयोग कर सकते है।

IPO मैनेजर्स और underwriters के बारे में जानकारी इक्ट्ठी करना – Review the underwriters and lead managers: कोई भी कंपनी जब अपने IPO को लॉच करने वाली होती है तो उसके उसकी प्रोसेसिंग और देख रेख के लिए underwriters और मैनेजर्स को अप्वॉइंट करती है जिनका काम कंपनी की इक्विटी का मूल्यांकन करना और सारे IPO प्रोसेस का ट्रैक रिकॉर्ड रखना होता है। अनुभवी और जानकार मैनेजर्स IPO के प्रोसेस को बिना किसी दिक्कत के लांच करने में मदद करते है।

कंपनी की खूबियों पर रिसर्च करे – Consider the company’s competitive advantage: IPO लाने वाली कंपनी की उसी सेक्टर की बाकि कंपनियों से तुलना करे। इन पॉइंट्स को नोटिस करे की IPO निकालने वाली कंपनी की ऐसी कौन सी खुबिया है जो उसे सेक्टर की बाकि कंपनियों के ऊपर बढ़त देती है। इन खूबियों में टेक्नोलॉजी, प्रॉपर्टी, स्ट्रांग प्रेजेंस, ब्रांड आदि शामिल हो सकते है। ऐसी ही खुबिया कंपनी को आगे बड़ने और इस कॉम्पिटिशन से भरे दौर में मार्केट में बने रहने में मदद करती है।

मार्किट सेंटीमेंट का ध्यान में रखे – Monitor the market sentiment: IPO के दौरान मार्किट कंडीशन और इन्वेस्टर सेंटीमेंट का विशेष ध्यान रखे। अगर मार्किट नेगेटिव है तो एक अच्छी कंपनी का IPO होने के बावजूद भी वे बढ़िया परफॉर्म नहीं कर पाता। पॉजिटिव मार्किट सेंटीमेंट IPO के सफल होने की सम्भावना को कई गुना तक बड़ा देता है।

फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह ले – Consult with financial advisers: अगर आपको IPO या स्टॉक मार्किट के बारे में पूरी जानकारी नहीं है तो एक अच्छा इन्वेस्टमेंट निर्णय लेने के लिए किसी फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह जरूर ले। वह अपने अनुभव और जानकारी के आधार पर आपको गाइड करने में मदद कर सकता है।

वोलैटिलिटी को ध्यान में रखे – Be prepared for volatility: इस बात का ध्यान रखे की IPO अपने लिस्ट होने के बाद शुरूआती दिनों में वोलेटाइल हो सकता है। IPO के आने के बाद और दौरान बड़ी मात्रा में शेयर्स की खरीद और बिक्री होने के कारण उसके दाम तेजी से घटते और बढ़ते है। इन्वेस्टर को चाहिए की वह अपने इन्वेस्टमेंट गोल को ध्यान में रखकर या तो शार्ट टर्म प्रॉफिट बुक कर ले या लॉन्ग टर्म होराइजन के हिसाब से इंवेस्टेड रहे।

निष्कर्ष –  Conclusion

इस बात को याद रखे की IPO में इन्वेस्टमेंट शार्ट टर्म में फायदे के साथ कई सारे जोखिमों को भी साथ लाता है। इन्वेस्टर को चाहिए की वह सोच समझ और फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लेने के बाद ही किसी IPO में इन्वेस्ट करे।

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