Types of Insurance in Hindi – इंश्योरेंस कितनी तरह के होते हैं? पूरी जानकारी

इंसानी जीवन अनिश्चितता से भरा हुआ है। अगले पल क्या नुक्सान हो जाए या कहां पैसे की जरुरत आन पड़े कोई नहीं कह सकता। ऐसी इमरजेंसी की स्तिथियों से निपटने के लिए इंसान को एक ऐसे साधन की जरुरत है जो उसकी सेविंग्स के पर असर डाले बिना ना सिर्फ फाइनेंशियल प्रोटेक्शन दे बल्कि मन की शांति भी प्रदान करे। ऐसे ही साधनों में सबसे पहला नाम इंश्योरेंस का आता है। आज की इस आर्टिकल “Types of Insurance in Hindi” में हम इंश्योरेंस और इसकी किस्मो के बारे में पूरी तरह से जानने की कोशिश करेंगे।

Types of Insurance in Hindi

इंश्योरेंस क्या होता है? – Insurance kya hota hai?

इंश्योरेंस एक कॉन्ट्रैक्ट है, जो की एक संस्था जिसे इंश्योरेंस कंपनी कहते है और एक नागरिक के बीच में होता है। इस कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत इंश्योरेंस कंपनी insured की गई संपति या इंसान को होने वाले किसी भी नुकसान के बदले फाइनेंशियल प्रोटेक्शन देने का वायदा करती है। कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत इंश्योरेंस लेने वाला इंसान एक फिक्स्ड टाइम पीरियड के लिए इंश्योरेंस कंपनी को एक फिक्स्ड रकम अदा करता है जिसे इंश्योरेंस प्रीमियम कहते है। इसके बदले इंश्योरेंस कंपनी इंस्योर्ड की गई चीज का नुक्सान होने पर मुआवजा प्रदान करती है।

इंश्योरेंस का कांसेप्ट रिस्क ट्रांसफर के प्रिंसिपल पर आधारित है। एक इंश्योरेंस पालिसी खरीद कर कोई व्यक्ति नुकसान के रिस्क को इंश्योरेंस कंपनी को ट्रांसफर कर देता है। इंश्योरेंस जीवन के अलग अलग पहलुओं को कवर करता है जिसमे स्वास्थ्य, जीवन, संपत्ति, बिजनेस और वाहन आदि शामिल हो सकते है। यह लोगो और बिजनेस को भविष्य में होने वाले संभावित नुकसान की चिंता से मुक्ति दिलाने में मदद करता है।

इंश्योरेंस लेना क्यों जरुरी है? – Insurance lena kyu jaruri hai?

इंश्योरेंस लेना कई सारे कारणों से महत्वपूर्ण माना जाता है जैसे की:

फाइनेंशियल प्रोटेक्शन – Financial Protection: इंश्योरेंस हमे इमरजेंसी की स्तिथि के दौरान फाइनेंशियल प्रोटेक्शन देने का काम करती है। ये घटनाओं जैसे की एक्सीडेंट, बीमारी या प्रॉपर्टी के नुकसान आदि से निपटने में हमारी काफी हद तक मदद कर सकती है।

रिस्क मैनेजमेंट – Risk Management: इंश्योरेंस, रिस्क मैनेजमेंट का एक अहम भाग है। यह लोगो को अपना रिस्क इंश्योरेंस कंपनी को ट्रांसफर करके फाइनेंशियल नुक्सान से बचाने में मदद करती है।

मन की शांति – Peace of Mind: इंश्योरेंस हमे अनिश्चित काल में होने वाले नुक्सान की चिंता से मुक्ति दिलाता है। यह चिंता चाहे अपने बच्चो का भविष्य की हो, future प्लैनिंग की हो या फिर बिजनेस को होने वाले नुक्सान की हो, इंश्योरेंस के अंतर्गत सब कवर किया जा सकता है।

कानूनी आवश्कता – Legal Requirements: बहुत सारे केस में इंश्योरेंस लेना सरकार द्वारा जरुरी किया गया है क्युकी यह कानूनी व्यवस्था को बनाये रखने और लोगो की जिंदगी की प्रोटेक्शन के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इंश्योरेंस लेना एक जिम्मेवार नागरिक होने के नाते हमारा फर्ज बन जाता है। उदाहरण के तौर पर मोटर इंश्योरेंस लेना भारत सरकार द्वारा हर नागरिक के लिए अनिवार्य किया गया है।

सेहत सुरक्षा – Healthcare Protection: हेल्थ इंश्योरेंस, लोगो को उनकी स्वास्थ्य पर बीमारी और एक्सीडेंट आदि से होने वाले नुक्सान पर कवरेज प्रदान करता है। व्यक्ति की सेहत एक ऐसी चीज है जो परिवार के भरण पोषण के लिए बनी रहना बहुत जरुरी है। ऐसे में स्वास्थ्य पर होने वाले खर्चों से बचने में हेल्थ इंश्योरेंस अहम भूमिका निभाता है।

सामान की सुरक्षा – Protection of Assets: लोगो के घर पे रखा कीमती सामान जिसके चोरी या खराब होने का खतरा बना रहता है, इनकी प्रोटेक्शन में भी इंश्योरेंस एक अहम भूमिका निभाता है।

यह भी जानिए: मेडिक्लेम और हेल्थ इंश्योरेंस में क्या फर्क है?

इंश्योरेंस कितनी तरह के होते हैं? – Types of Insurance in Hindi

भारत में लोगो और संपत्ति के लिए कई तरह की इंश्योरेंस पॉलिसी उपलब्ध है, जैसे लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस, होम इंश्योरेंस और मोटर इंश्योरेंस आदि। लोग अपनी जरुरत और बजट के हिसाब से किसी भी पालिसी का चुनाव कर सकते है। इन पॉलिसियों में मुख्य और सब से ज्यादा काम में ली जाने जाने वाली निचे दर्शाई गई है।

लाइफ इंश्योरेंस – Life Insurance

लाइफ इंश्योरेंस पालिसी में इंश्योरेंस कंपनी इंश्योरेंस लेने वाले व्यक्ति की मौत या पालिसी के mature होने पर उसे या नॉमिनी को कंपनसेशन देने का कॉन्ट्रैक्ट करती है जिसके बदले में insured व्यक्ति एक फिक्स्ड प्रीमियम का भुगतान, लिए गए प्लान के अनुसार करता है। दुनिया में सभी का जीवन अनिश्चित है और कल क्या हो जाए इसके बारे में कोई भी कुछ नहीं कह सकता। ऐसी अनिश्चितता से बचने और अपने परिवार को financial प्रोटेक्शन देने के लिए लाइफ इंश्योरेंस एक बहुत अच्छा साधन है।

लाइफ इंश्योरेंस पालिसी की अपने आप में कई तरह की किस्में होती है जिन्हे विभिन्न लोगो की जीवनशैली को ध्यान में रखकर त्यार किया जाता है। लाइफ इंश्योरेंस पालिसी का सबसे बड़ा फायदा यह है की व्यक्ति की अकस्मात मौत के केस में परिवार के निर्भर लोगो का भविष्य सुरक्षित रहता है। इसके इलावा ऐसे प्लान भी है जिनमे अगर इंसान को पुरे इंश्योरेंस कार्यकाल के दौरान कुछ नहीं होता तो भरा गया प्रीमियम अच्छे ब्याज के साथ लौटा दिया जाता है। इसके इलावा अगर आपने कोई भी लाइफ इंश्योरेंस पालिसी ले रखी है तो आपको सेक्शन 80C और 80D के अंतर्गत इनकम टैक्स में रिबेट मिलती है। लाइफ इंश्योरेंस की किस्में निचे दर्शाई गई है:

टर्म लाइफ इंश्योरेंस – Term Life Insurance: टर्म लाइफ इंश्योरेंस एक निश्चित टर्म या समय अंतराल, जो की आमतौर पर 5 से 30 साल का होता है के लिए इंश्योरेंस कवरेज प्रदान करता है। इसके अंतर्गत, अगर insured व्यक्ति की मौत टर्म इंश्योरेंस के टेन्योर के दौरान हो जाती है तो नॉमिनी को एक फिक्स्ड अमाउंट अदा की जाती है जो पालिसी लेने वाले द्वारा पालिसी लेते वक्त निश्चित की गई होती है।

लाइफ इंश्योरेंस – Whole Life Insurance: एक लाइफ इंश्योरेंस व्यक्ति को पूरी लाइफ का कवरेज प्रदान कर सकती है। टर्म इंश्योरेंस के विपरीत इसमें व्यक्ति के पुरे जीवन काल को कवर किया जाता है और insured व्यक्ति की मौत अगर कभी भी होती है तो नॉमिनी को एक फिक्स्ड अमाउंट कंपनसेशन के रूप में मिलता है।

एंडोमेंट प्लान्स – Endowment Plans: एंडोमेंट प्लान्स आपको लाइफ इंश्योरेंस की कवरेज देने के साथ ही सेविंग्स करने का अवसर भी प्रदान करते है। यह इन्वेस्टमेंट और लाइफ इंश्योरेंस दोनों का कॉम्बिनेशन है जिसमे अगर आप पालिसी टर्म को पूरा कर जाते है तो आप एक फिक्स्ड मैच्योरिटी बेनिफिट क्लेम कर सकते है।

मनी बैक पालिसी – Money-Back Policies: मनी बैक पालिसी डेथ इंश्योरेंस कवर के साथ साथ पालिसी टर्म के दौरान पीरियोडिक रिटर्न भी ऑफर करते है। इसमें insured व्यक्ति को निश्चित समय अंतराल में survival बेनिफिट के रूप में sum assured का कुछ हिसा मनी बैक के रूप में वापिस किया जाता है। अगर insured व्यक्ति पालिसी का पूरा पीरियड निकाल लेता है तो उसे पूरा बचा हुआ पैसा maturity बेनिफिट के रूप में वापिस कर दिया जाता है।

यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान्स – Unit-Linked Insurance Plans (ULIPs): ULIPs इन्वेस्टमेंट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान्स होते है की जो इंश्योरेंस कवर देने के साथ साथ ही स्टॉक मार्किट की सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट करने का मौका देते है। इनका भी फिक्स्ड मैच्योरिटी पीरियड होता है जिसमे भरे गए प्रीमियम का कुछ हिस्सा इन्वेस्टमेंट में और कुछ हिस्सा इंश्योरेंस कवर के लिए अलॉट किया जाता है।

पेंशन प्लान – Pension Plans: पेंशन प्लान्स, जिन्हे की रिटायरमेंट प्लान्स भी कहते है लोगो को अपने बुढ़ापे के दिनों के लिए इन्वेस्टमेंट द्वारा पूंजी जमा करके का अवसर देते है। इसमें लोग पालिसी टर्म के अनुसार और अपनी भविष्य की जरूरत के हिसाब से फंड को इकट्ठा करने के लिए प्रीमियम भरते है जिसे की रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

हेल्थ इंश्योरेंस – Health Insurance

हेल्थ इंश्योरेंस आपको अपनी सेहत पे होने वाले खर्चों जो की किसी बीमारी, एक्सीडेंट या महामारी के कारण हो सकते है, से फाइनेंशियल प्रोटेक्शन प्रदान करता है। यह पालिसी आपके हॉस्पिटल, दवाई और ऑपरेशन से लेकर इमरजेंसी तक के सभी तरह के खर्चो को कवर सकती है। हेल्थ इंश्योरेंस आपको हॉस्पिटल के अकस्मात होने वाले खर्चो से बचाने के साथ साथ ही सेविंग्स को भी सुरक्षित रखने का काम करती है। हेल्थ इंश्योरेंस प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह के हॉस्पिटल्स में मान्य होता है और इसके तहत:

सभी तरह के मेडिकल खर्चे कवर होते जिनमे pre और post hospitalization, एम्बुलेंस, मेडिसिन, मैटरनिटी आदि खर्चे शामिल होते है। यह बेनिफिट बीमारी और लिए गये प्लान के ऊपर निर्भर करते है।

कैशलेस ट्रीटमेंट का लाभ उठा सकते है जिसके अंतर्गत आप कोई भी खर्चा खुद उठाये बिना ही हॉस्पिटल में इलाज करवा सकते है। इसमें हॉस्पिटल का बिल सीधे कंपनी द्वारा सेटल कर लिया जाता है।

हेल्थ इंश्योरेंस से जुडी कई तरह की ऐसी टर्म्स है जिनके बारे में पालिसी लेने से पहले जान लेना बहुत जरुरी है। इनमे से कुछ जरुरी टर्म्स है:

Sum Insured: वह ज्यादा से ज्यादा रकम जो की एक इंश्योरेंस कंपनी मेडिकल खर्चो के एवज में insured व्यक्ति को अदा करती है।

Pre-existing Conditions: यानि की वह बीमारियां जो इंश्योरेंस पालिसी के अंतर्गत एक फिक्स्ड टाइम पीरियड जिसे की वेटिंग पीरियड कहते है, के बाद ही कवर की जाती है।

Premiums: पॉलिसी होल्डर्स को पालिसी लेने के एवज में एक रेगुलर पेमेंट निश्चित समय काल के लिए करनी पड़ती है जिसे की पालिसी प्रीमियम कहते है।

Network Hospitals: उन हॉस्पिटल्स की गिनती जिनसे इंश्योरेंस कंपनी का tie up है और जहां से इलाज कराने इंश्योरेंस लेने वाला कैशलेस ट्रीटमेंट का लाभ ले सकता है।

मोटर इंश्योरेंस – Motor Insurance

मोटर इंश्योरेंस जिसे ऑटो इंश्योरेंस भी कहा जाता है, आपके वाहन को होने वाले नुकसान के खर्चे से आपको फाइनेंशियल प्रोटेक्शन प्रदान करता है। इसके अंतर्गत कई तरह के रिस्क कवर होते है जिसमे वाहन से लेकर वाहन चलाने वाला तक कवर होता है। आमतौर पर मोटर इंश्योरेंस वाहन चालक को होने वाला नुक्सान जिसमे शारीरिक चोट, मौत, और वाहन का नुक्सान आदि जो की किसी थर्ड पार्टी वाहन द्वारा किया गया को कवर करता है।

इसके इलावा इसका मुख्या उद्देश्य वाहन के उस नुक्सान को कवर करना है जो की किसी एक्सीडेंट, चोरी, प्राकर्तिक आपदा, आग या किसी अन्य कारण द्वारा होती है। मोटर इंश्योरेंस पालिसी मुख्यता दो तरह की होती है:

थर्ड पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस – Third-Party Liability Insurance: यह मोटर इंश्योरेंस की सबसे बेसिक और सरकार द्वारा जरुरी की गई इंश्योरेंस पालिसी है जो की आपको वाहन के साथ लेनी ही पड़ती है। यह सिर्फ उस नुक्सान को कवर करता है जो की वाहन चालक द्वारा किसी अन्य वाहन यानि की थर्ड पार्टी का किया गया हो। इसमें इंश्योरेंस लेने वाले को और उसके वाहन को इंश्योरेंस कंपनी द्वारा कोई भी प्रोटेक्शन नहीं दी जाती।

कम्प्रेहैन्सिव इंश्योरेंस – Comprehensive Insurance: थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के विपरीत यह दोनों, अपने वाहन और थर्ड पार्टी की किसी दुर्घटना से होने वाले नुक्सान के लिए कवरेज प्रदान करती है। थर्ड पार्टी के मुकाबले इसका प्रीमियम ज्यादा होता है और यह कई तरह के रिस्क को कवर करती है।

होम इंश्योरेंस – Home Insurance

होम इंश्योरेंस, जैसा की नाम से ही जाहिर है, इस तरह की इंश्योरेंस जो की घर और प्रॉपर्टी को होने वाले नुकसान से हमे कवरेज प्रदान करता है। यह घर और उस से जुड़े सामान को होने वाले नुक्सान से बचाने के लिए डिज़ाइन किए जाते है और यह एक रेंज जिसमे आग, चोरी और प्राक्रतिक आपदा समेत कई सारे और नुक्सान के केस में मुआवजा प्रदान करती है। होम इंश्योरेंस आमतौर पर:

घर के ढांचे को होने वाले नुक्सान जिसमे छते, दीवारे, दरवाज़े और खिड़किया आदि शामिल होते है, को कवर करता है।
इसके इलावा घर के कीमती सामान जैसे की सोफे, बेड, कपडे, इलेक्ट्रिकल उपकरण आदि को भी कवर किया जाता है।

कई पॉलिसीस के अंतर्गत अगर insured किए गए घर के सामान के कारण किसी और व्यक्ति से सम्भतित सामान का नुक्सान होता है तो उसका कंपनसेशन भी दिया जाता है।

ट्रेवल इंश्योरेंस – Travel Insurance

जब भी कोई इंसान किसी काम से या कहीं घूमने के इरादे से बाहर सफर करता है तो उसे उस सफर से होने वाले रिस्क और अनिश्चितता का भी सामना करना पड़ता है। ये सफर देश या विदेश दोनों में हो सकता है। ऐसे में ट्रेवल इंश्योरेंस एक ऐसा साधन है जो आपको अपने सफर के दौरान होने वाले नुक्सान की भरपाई के लिए कंपनसेशन देने का काम करता है। ट्रेवल इंश्योरेंस आमतौर पर:

अगर ट्रिप कैंसिल हो जाती है या किसी बीमारी, चोट और दुर्घटना और कारण से पूरी नहीं हो पाती, तो होने वाले नॉन रिफंडेबल खर्चो को कवर करता है।

इमरजेंसी में होने वाले मेडिकल खर्चे जैसे किए गए ट्रीटमेंट, hospitalisation जो की यात्रा के दौरान हुआ हो, उन्हें कवर करता है।

अगर यात्रा के दौरान आपका सामान, डॉक्यूमेंट या कोई कीमती वस्तु खो जाए या चोरी हो जाती है तो उसका कंपनसेशन प्रदान करता है।

ट्रिप के दौरान होने वाली देरी और अन्य फैक्टर्स जो की हमारे बस में ना हो, पर होने के कारण होने वाले खर्चे के एवज में प्रोटेक्शन देता है।

एक्सीडेंट के कारण हुई मौत या परमानेंट डिसेबिलिटी होने पर कंपनसेशन और प्रोटेक्शन देता है।

यहां इस बात को नोट रखना जरुरी है की ऊपर बताए गए सभी फैक्टर्स इंश्योरेंस कंपनी और लिए गए प्लान पर निर्भर करती है और इनमे फर्क हो सकता है। इसलिए कोई भी ट्रेवल इंश्योरेंस लेने से पहले उसकी शर्तो और बेनिफिट के बारे में पूरी तरह से जांच कर लेना जरुरी बन जाता है।

कमर्शियल इंश्योरेंस – Commercial Insurance

कमर्शियल इंश्योरेंस जिसे की बिज़नेस इंश्योरेंस भी कहा जाता है, बिज़नेस को होने वाले सभी रिस्क, नुक्सान और जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह बिज़नेस को उन अप्रत्याशित घटनाओ से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया जिनसे कंपनी के काम में बाधा आती है, उसे नुक्सान होता है या फिर लीगल तौर पर कंपनी के कामकाज पर असर पड़ता है।

कमर्शियल इंश्योरेंस के विभिन प्लान अलग अलग तरह के बिज़नेस की जरूरतो को ध्यान में रखते हुए त्यार किये जाते है। आप अपने बिज़नेस के नेचर और उसमे संभावित जोखिमों के मुताबिक इंश्योरेंस पालिसी का चुनाव कर सकते है।

क्रॉप इंश्योरेंस – Crop Insurance
क्रॉप इंश्योरेंस या फसल बीमा मुख्य रूप से किसानो को उनके फसल के खराब या बर्बाद होने से हुए नुकसान से बचाने के लिए त्यार किये गए है। फसल की पैदावार और इसका खराब होना कई सारे फैक्टर्स पर निर्भर करता है जैसे की प्राकर्तिक आपदा, बारिश का कम या ज्यादा होना, कीटो के कारण होने वाला नुकसान और आग आदि। किसानो को इन कारको से होने वाले नुक्सान का मुआवजा देने के लिए भारत सरकार ने इंश्योरेंस कंपनियों के सहयोग के साथ फसल बिमा योजना को शुरू किया है जो की भारत की सबसे अहम् और किफायती फसल बीमा योजना है।
इस योजना का नाम प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना है जिसे साल 2016 में शुरू किया गया था। इसके अंतर्गत किसान बहुत ही कम प्रीमियम में एक अच्छी रकम का फसल बीमा कवर ले सकते है। इस योजनाओ के इलावा भी बहुत से ऐसे प्लान है जो प्राइवेट कंपनियों द्वारा चलाये जा रहे है। किसान अपने सामर्थ्य के अनुसार इन योजनाओ में से किसी एक का चुनाव कर सकते है।
मरीन इंश्योरेंस – Marine Insurance

हमारे रोज मर्रा का और सभी तरह का कमर्शियल सामान कई साधनो द्वारा एक जगह से दूसरी जगह पर ट्रान्सफर किया जाता है। इन साधनो में समुन्द्र द्वारा सामान को ट्रांसफर करना एक आम प्रक्रिया है। ट्रांसपोर्ट के इस तरीके में सामान को बड़े शिप्स और वेसल्स में लाद कर समुन्द्र मार्ग द्वारा एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाया जाता है। ट्रांसपोर्ट के इस तरीके में शिप के डूबने या सामान के खो जाने का का खतरा रहता है। मरीन इंश्योरेंस इस तरह से होने वाले मुकसान से प्रोटेक्शन देने में मदद करता है। मरीन इंश्योरेंस के अंतर्गत मुख्यता:

शिप को, वेसेल को और शिप में शामिल सामान को होने वाले फिजिकल डैमेज को कवर किया जाता है।

वह नुक्सान जो प्राकर्तिक आपदा जैसे की तूफ़ान, बाढ़, एक्सीडेंट, पायरेसी, चोरी, आग और समुन्द्र से जुड़े कारणों के कारण होता है, कवर किया जाता है।

कई तरह के पॉलिसी ऑप्शन उपलब्ध होते है जिसमे एक विशिष्ट यात्रा को कवर करने वाली, एक विशिष्ट समय कार्यकाल को कवर करने वाली और दोनों के कॉम्बिनेशन वाली पालिसी मुख्य है।

आप इंश्योरेंस को लेने उस से जुडी सभी जानकारी पाने के लिए इन Sites को इस्तेमाल कर सकते है:

PolicyBazaar

InsuranceDekho

CoverFox

निष्कर्ष – Conclusion

ऊपर बताई गई किस्में, इंश्योरेंस की कुछ महत्वपूर्ण किस्में ही है जो की सबसे ज्यादा इस्तेमाल में लाई जाती है। इनके इलावा भी मार्किट में इंश्योरेंस की बहुत सारी किस्में मौजूद है। यह जरुरी है की कोई भी पालिसी खरीदने से पहले अपनी जरूरतों के आकलन किया जाए और किसी एक्सपर्ट प्रोफेशनल की सलाह से साथ के उपयुक्त कवर का चुनाव किया जाए। इंश्योरेंस लेना हमारी फाइनेंशियल प्लानिंग का एक अहम हिस्सा होता है और जीवन के मुश्किल पलो में हमारी पैसे की चिंता को काफी हद तक दूर कर देता है।

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