Annuity Plan kya hote hai – जानिए एन्युटी प्लान क्या है, और कैसे काम करता है? फायदे और नुकसान

फाइनेंशियल प्लानिंग का एक अहम भाग है, रिटायरमेंट प्लानिंग। रिटायरमेंट प्लानिंग, यानी की उस समय के लिए प्लानिंग जब आपके पास इनकम का कोई सोर्स ना हो। रिटायरमेंट के बाद हर कोई एक आरामदायक जीवन जीना चाहता है, जहां वह बिना किसी  पर निर्भर रहे अपनी दैनिक जरूरतों को पुरा कर सके। इसी रिटायरमेंट प्लानिंग में एन्यूटी प्लान आपकी काफी मदद कर सकते है। आज हम अपने इस आर्टिकल के माध्यम से जानेंगे की Annuity Plan kya hote hai, कैसे काम करते है, और किस तरह हमारे लिए फायदेमंद है।

Annuity plan kya hote hai

एन्यूटी प्लान क्या होते है – Annuity Plan kya hote hai

एन्यूटी प्लान जिन्हे पेंशन प्लान भी कहा जाता है, इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा ऑफर किए जाने वाले स्पेशल रिटायरमेंट प्लान होते है। इन प्लान में इन्वेस्ट करने के बदले आपको रिटायरमेंट या तय की गई उम्र के बाद एक रेगुलर इनकम का फायदा मिलता है। यह इंश्योरेंस कम्पनी और इन्वेस्टर के बीच में एक तरह का लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट होता है। इस एग्रीमेंट के तहत आप इंश्योरेंस कम्पनी को लंप्सम या लिमिटेड टाइम के लिए प्रीमियम की पेमेंट करते हो, जिसके बाद इंश्योरेंस कम्पनी आपको एन्यूटी के रूप में रेगुलर इनकम का फायदा देती है।

एन्यूटी प्लान एक इंसान की रिटायरमेंट प्लानिंग में अहम भूमिका निभा सकते है। जिन लोगो के पास रिटायरमेंट के लिए कोई सेविंग्स नही है, या वह अपनी रिटायरमेंट होने पर किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहते, उन लोगो के लिए यह प्लान बहुत फायदेमंद हो सकते है, जिसमे आप अपने नौकरी के दिनों में प्रीमियम का भुगतान करके रिटायरमेंट बाद अच्छी रिटर्न समेत उसे वापिस पा सकते है।

एन्यूटी प्लान कैसे काम करते है – Annuity Plan kaise kaam karte hai

किसी भी इंश्योरेंस प्रोडक्ट की तरह एन्यूटी प्लान में भी एकमुश्त या रेगुलर फिक्स्ड राशि के रूप में प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है। इस प्रीमियम की राशि, आपके द्वारा लिए गए प्लान और उसमे शामिल ऑप्शनल बेनिफिट्स पर निर्भर करती है। फिर रिटायरमेंट के बाद आपको रिटर्न समेत लंप्सम या रेगुलर पेमेंट के तौर पर एन्यूटी की रकम का भुगतान किया जाता है। चलिए इस सारे प्रोसेस को एक उदाहरण के माध्यम से समझते है।

मान लीजिए अमित एक 40 साल का प्रोफेशनल है, जो अपनी रिटायरमेंट के बाद की इनकम का इंतजाम करना चाहता है। इसके लिए वह किसी इंश्योरेंस कम्पनी का एन्यूटी प्लान खरीदता है, जिसके तहत वह 10 लाख उसमे इन्वेस्ट करता है। इस 10 लाख की पेमेंट करने के लिए उसने 10 PPT का चुनाव किया है, यानी की उसे 50 साल की उम्र तक हर साल, 1 लाख रुपए की पेमेंट करनी है।

अमित की रिटायरमेंट यानी की 60 साल के बाद उसे एन्यूटी का पैसा मिलना शुरू होगा, और इस 60 साल और 50 के बीच में जो 10 साल का फर्क है, उसे डेफरमेंट पीरियड कहा जाता है। 60 साल के बाद अमित को रिटर्न के अनुसार बनती 1 से 1.50 लाख की पेमेंट का भुगतान लगातार हर साल उसके आगे के जीवनकाल के लिए जायेगा। यहां इस बात का ध्यान रहे को एन्यूटी लेने के लिए इंवेस्टर के पास कई सारी ऑप्शन हो सकती है, जिनके बारे में हम आगे के आर्टिकल में जानेंगे।

एन्यूटी प्लान की विशेषताएं – Features of Annuity Plan in hindi

गेरेंटेड रिटर्न: एन्यूटी प्लान आपको रिटायरमेंट के बाद एक फिक्स्ड अमाउंट के रूप में इनकम के गारंटी देते है। यह इनकम आपके चुने गए प्लान की विशेषता और फायदे से निर्धारित होती है, जिसके बारे में अपको इन्वेस्टमेंट करते समय ही बता दिया जाता है। एन्यूटी प्लान में गेरेंटेड रिटर्न होने के कारण रिस्क की संभावना बहुत कम हो जाती है।

डेथ बेनिफिट: कई एन्यूटी प्लान में आपको रेगुलर इनकम के साथ डेथ बेनिफिट का भी फायदा मिलता है। इसका मतलब अगर बीमित व्यक्ति की किसी कारण मृत्यु हो जाती है, तो उसके नॉमिनी को एक लंप्सम रकम का भुगतान किया जाता है, जो उनके फ्यूचर को सिक्योर और उन्हें फाइनेंशियल तौर पर स्टेबल रहने में मदद करता है।

ज्वाइंट लाइफ ऑप्शन: कई सारे एन्यूटी प्लान आपको ज्वाइंट लाइफ का ऑप्शन भी ऑफर करते है। इस ऑप्शन के तहत एक से ज्यादा लोग एन्यूटी प्लान के लिए एनरोल लिए जाते है। जैसे की पति के साथ पत्नी भी एन्यूटी के लिए एलिजिबल हो सकती है, जिसमे अगर किसी केस में पति की मौत हो जाती है, तो एन्यूटी की रकम उसकी पत्नी को मिलनी शुरू हो जाती है। इस ऑप्शन के लिए शर्ते और एलेजिबिल्टी अलग अलग हो सकती है, जिनका ध्यान पॉलिसी को खरीदते समय रखना जरूरी होता है।

डेफरमेंट पीरियड: डेफरमेंट उस टाइम पीरियड को कहते है जो आपके द्वारा पूरे प्रीमियम भरे जाने के बाद से एन्यूटी शुरू होने के बीच का समय तक होता है। यानी अगर आपने पूरे प्रीमियम का भुगतान 2040 में कर दिया है, और आपको इनकम 2050 में शुरू होनी है, तो बीच के 10 सालो को डेफरमेंट पीरियड कहा जायेगा। डेफरमेंट पीरियड जितना ज्यादा होगा, आपकी पॉलिसी के रिटर्न और इनकम बेनिफिट उतने ही अच्छे होंगे।

फ्लेक्सिबल: एन्यूटी प्लान में हमारे पास प्रीमियम पेमेंट और इनकम लेने, दोनो की फ्लेक्सिबिल्टी होती है। यानी की हम अपनी चॉइस और जरूरत अनुसार प्रीमियम की पेमेंट एकमुश्त या लिमिटेड पीरियड के लिए कर सकते है। एन्यूटी में भी हमारे पास कोई डेफरमेंट ना लेने से लेकर उसके पीरियड का चुनाव करने की ऑप्शन होती है।

एन्यूटी प्लान कितने प्रकार के होते है – Annuity Plan kitne prakaar ke hote hai

एन्यूटी प्लान मुख्यता 5 तरह के होते है:

Immediate Annuity: Immediate एन्यूटी प्लान उन लोगो के लिए उपयुक्त है, जो रिटायरमेंट के बहुत करीब है, और जिन्हे तुरंत पेंशन या रेगुलर इनकम की जरूरत है। इस प्लान के तहत इंश्योरेंस कम्पनी को प्रीमियम का भुगतान रेगुलर करने की बजाय एकमुश्त राशि में किया जाता है। जिसके बाद बिना किसी वेटिंग पीरियड या डेफरमेंट पीरियड के बाद उन्हें एन्यूटी के रूप में रेगुलर पेमेंट का भुगतान किया जाता है।

डेफर्ड एन्यूटी: डेफर्ड एन्यूटी प्लान में प्रीमियम पेमेंट के भुगतान और एन्यूटी की इनकम शुरू होने के बीच कुछ सालो का वेटिंग पीरियड होता है। इस वेटिंग पीरियड के दौरान इंश्योरेंस कम्पनियों को आपके द्वारा भरी को गई प्रीमियम अमाउंट को इन्वेस्ट करके एक अच्छी रिटर्न जेनरेट करने का समय मिल जाता है। इस बात को आप पॉलिसी को खरीदते वक्त भी नोटिस कर सकते है की, जितना कम डेफरमेंट पीरियड होगा उतना ही कम एन्यूटी अमाउंट भी जमा हो पाएगा। यह प्लान उन लोगो के लिए उपयुक्त है, जिनकी रिटायरमेंट को अभी काफी समय बचा है, और जो अपनी इनकम के शुरुआती दिनों में ही इन्वेस्ट करके वह एक अच्छी पेंशन का लाभ उठाना चाहते है।

लंप्संप एन्यूटी: एन्यूटी प्लान के मुख्य फायदा उसका आपको रिटायरमेंट के बाद दी जाने वाली रेगुलर इनकम है। लेकिन कई केसेस में लोग रेगुलर इनकम की जगह एक ही बार में सारी रकम को लेना चाहते है। ऐसा वह लंप्सम एन्यूटी प्लान के तहत कर सकते है, जहां पर एक फिक्स्ड टाइम पीरियड के बाद हमारे पास यह ऑप्शन होती हैं की पैसे को रेगुलर इनकम के रूप में लेना है, या फिर एक ही बार में पूरी अमाउंट को निकलवाना है। हालांकि एन्यूटी प्लान का यह फीचर इंश्योरेंस कंपनी पर निर्भर करता है, हो सकता है प्लान में पूरी अमाउंट को निकलवाना संभव ना हो और आप कुछ प्रतिशत को पेंशन के रूप में और बचे हुए हिस्से को ही लंप्सम अमाउंट के रूप में ले पाएं।

फिक्स्ड एन्यूटी: जैसा की नाम से की जाहिर है, फिक्स्ड एन्यूटी प्लान में मिलने वाली रेगुलर पेमेंट फिक्स्ड होती है। यह एन्यूटी का ज्यादातर इस्तेमाल होने वाला ट्रेडिशनल तरीका है। इस प्लान के तहत मिलने वाली एन्यूटी अमाउंट को पॉलिसी खरीदते वक्त ही निर्धारित कर दिया जाता है, जो पूरी पेमेंट टर्म के दौरान एक सी ही रहती है।

Variable एन्यूटी: Variable एन्यूटी में मिलने वाली एन्यूटी अमाउंट फिक्स्ड नहीं होती। इस तरह के एन्यूटी प्लान में इंश्योरेंस कम्पनी हमारे द्वारा भरी जाने वालीं इंश्योरेंस प्रीमियम की रकम, चुने गए म्यूचुअल फंड जैसे पोर्टफोलियो में इन्वेस्ट करती है। एन्यूटी प्लान के तहत मिलने वाला पैसा इसी इन्वेस्ट किए गए म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो की परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है। यह प्लान उन लोगो के लिए फायदेमंद हो सकते है, जो ज्यादा रिस्क ले सकते है, या फिर जिन्हे पेंशन प्लान के साथ साथ ही मार्केट लिंक्ड रिटर्न का लाभ भी उठाना है।

एन्यूटी प्लान किसे खरीदना चाहिए – Annuity Plan kise kharidna chahiye

एन्यूटी प्लान रिटायरमेंट प्लानिंग में एक अहम किरदार निभा सकते है। यह उन लोगो के लिए एक अच्छी चॉइस हो सकती है जिनके पास रिटायरमेंट के बाद पेंशन जैसी इनकम का कोई भी साधन नही है, और जो अपने बुढ़ापे के दिनों के लिए एक अच्छी रेगुलर इनकम का इंतजाम करना चाहते है। ज्यादा उम्र हो जाने पर लोग ज्यादा रिस्क लेने और रिस्की एसेट इन्वेस्ट करने से बचते है। एन्यूटी प्लान की गेरेंटेड इनकम भी इसको एक बेहतर विकल्प के तौर पर पेश करता है। इसमें रिस्क की संभावना बहुत कम होती है, क्युकी ज्यादातर ट्रेडिशनल प्लान गेरेंटेड इनकम की सुविधा देते है।

इसके इलावा एन्यूटी प्लान को खरीदने पर आप इनकम टैक्स के कई सेक्शन के अन्तर्गत टैक्स में रिबेट ले सकते है। इस तरह वह लोग जिन्हे अपने इनकम टैक्स रिटर्न पर बचत करनी है, उनके लिए भी यह प्लान अच्छा ऑप्शन साबित हो सकते है।

एन्यूटी प्लान कैसे खरीदे – Annuity Plan kaise kharide

किसी भी इंश्योरेंस प्रोडक्ट की तरह आप एन्यूटी प्लान को आसानी से किसी भी इंश्योरेंस ब्रोकर, एजेंट या इंश्योरेंस कंपनियों के ऑफिस से खरीद सकते है। ऑनलाइन माध्यम में आप कई सारे प्लेटफार्म जैसे policybazaar, insurancedekho आदि की मदद ले सकते है। इन प्लेटफार्म पर लगभग सभी इंश्योरेंस कंपनियों के प्रोडक्ट उपलब्ध होते है, जिन्हे कंपेयर करके आप एक अच्छा निर्णय के सकते है।

वहीं अगर ऑफलाइन मोड की बात करे तो आपको इंश्योरेंस एजेंट या खुद इंश्योरेंस कम्पनी के ऑफिस जाना होगा। इन लोगो की मदद से आप ऑफर किए जा रहे एन्यूटी प्लान के सभी फीचर, जरूरी जानकारी और उसे खरीदने के लिए लगने वाले सभी जरूरी डॉक्यूमेंट के बारे में जान सकते है।

एन्यूटी प्लान के फायदे – Annuity Plan ke fayde

रेगुलर इनकम: एन्यूटी प्लान अपको रिटायरमेंट के बाद होने वाले रोजाना के खर्चों के लिए रेगुलर इनकम देता है। यह आपके भविष्य को सिक्योर करने और किसी और पर निर्भरता को कम करने में मदद करता है। इन प्लान में मिलने वाली रेगुलर इनकम गेरेंटेड होती है, यानी की जितनी एनुअल या मंथली इनकम को आप पॉलिसी को खरीदते वक्त चुनते हो उतनी ही अपको तय फिक्स्ड टाइम पीरियड के बाद दी जाती है।

फ्लेक्सिबल पेमेंट: एन्यूटी प्लान में अपको पेमेंट लेने के मेथड में फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है। आप अपनी सहूलियत अनुसार मंथली, हाफ इयरली और इयरली आदि ऑप्शन का चुनाव कर सकते है। इसी तरह पेमेंट को भरते वक्त आपके पास यह ऑप्शन होती है की आप एकमुश्त राशि के रूप में तुरंत एन्यूटी पेमेंट को शुरू करवा सकते है, या फिर रेगुलर पेमेंट देकर भी आप इस सुविधा का लाभ उठा सकते है।

डेथ बेनिफिट: कई एन्यूटी प्लान में अपको पेंशन पेमेंट के साथ ही डेथ बेनिफिट का ऑप्शन भी दिया जाता है। यानी की अगर किसी कारणवश पॉलिसी होल्डर को मौत हो जाती है, तो उसके नॉमिनी को एक लंप्सम अमाउंट का भुगतान किया जाता है।

कोई मार्केट रिस्क नहीं: कुछ एन्यूटी प्लान को छोड़कर बाकियों में आपको मार्केट रिस्क की कोई चिंता करने की जरूरत नही होती, क्युकी इसमें मिलने वाली एन्यूटी फिक्स्ड और गेरेंटेड होती है। यानी की आपको पहले से ही इस बात की जानकारी दे दी जाती है की एन्यूटी शुरू होने पर अपको कितना पैसा रेगुलर पेमेंट के रूप में सालाना या चुने गए इंटरवल के अनुसार मिलेगा।

टैक्स बेनिफिट: एन्यूटी प्लान के तहत भरी की गई प्रीमियम की पेमेंट पर आप इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80ccc के तहत 1.50 लाख तक की टैक्स रिबेट को क्लेम कर सकते है।

एन्यूटी प्लान के नुकसान – Annuity Plan ke nuksaan

कम रिटर्न: ज्यादातर एन्यूटी प्लान कम रिस्क और गेरेंटेड रिटर्न के साथ आते है। फिक्स्ड रिटर्न होने का मतलब इनका फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट में इन्वेस्ट किया जाना है। यह रिटर्न अन्य मार्केट लिंक्ड प्लान को तुलना में काफी कम होती है। जिससे हमारा रिस्क कंट्रोल में रहता है, लेकिन हमे इक्विटी या अन्य मार्केट लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट जैसी रिटर्न नहीं मिल पाती।

प्रीमेच्योर विड्रॉल: एन्यूटी प्लान को रिटायरमेंट फंड की तरह देखा जाता है, इसलिए इनमे लॉन्ग टर्म में किसी तरह की विड्रॉल नही ली जा सकती। यानी अगर किसी समय आपको पैसे की जरूरत पड़ती है, तो आप एन्यूटी प्लान में इन्वेस्ट किया गया पैसा समय से पहले नही निकलवा सकते। हालांकि कई एन्यूटी प्लान इस सुविधा को ऑफर करते है, लेकिन यह कड़े रूल्स और रेगुलेशन के साथ आता है।

एन्यूटी प्लान पर टैक्सेशन – Annuity Plan par taxation

एन्यूटी प्लान के लिए की गई प्रीमियम के पेमेंट पर हमे सेक्शन 80C, 80CCC और 80CCD के अन्तर्गत टैक्स रिबेट मिलती है। इस रिबेट को आप 1.50 लाख तक की रकम तक एक फाइनेंशियल ईयर में क्लेम कर सकते हो। जब अपको एन्यूटी की अमाउंट का भुगतान शुरू किया जाता है, तो यह सैलरी की तरह ही काउंट किया जाता है और आपकी इनकम में शामिल होता है। इस पर आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार ही टैक्स एप्लिकेबल होता है।

यह भी जाने : Money back policy in hindi – जानिए मनी बैक पॉलिसी क्या है और कैसे काम करती है

निष्कर्ष – Conclusion

एन्यूटी प्लान रिटायरमेंट प्लानिंग का अहम भाग बन सकते है। यह अच्छी रिटर्न ऑफर करने के साथ साथ, रेगुलर इनकम, टैक्स बेनिफिट और कई केसेस डेथ क्लेम जैसे बेनिफिट प्रदान करते है। अगर आप भी अपने रिटायरमेंट दिनों के लिए एक अच्छा इनकम का सोर्स बनाना चाहते है, तो आप भी एन्यूटी प्लान में इन्वेस्ट करने के बारे में सोच सकते है।

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