Sahi Mutual Fund kaise chune? – जानिए म्यूचुअल फण्ड में इन्वेस्ट करते समय किन बातो का ध्यान रखा जाये?

आजकल के महगांई के ज़माने में हम सभी को निवेश के एक ऐसे साधन की जरुरत है जो कम इन्वेस्टमेंट होने पर भी अच्छी रिटर्न दे सके और इसी में म्यूचुअल फंड पूरी तरह से खरे उतरते है। किसी भी अन्य निवेश के साधन की तरह यह भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, लेकिन कुछ ऐसी बाते है जिनका ख्याल रख कर ना सिर्फ हम एक अच्छी म्यूचुअल फंड स्कीम का चुनाव कर सकते है बल्कि अपनी इन्वेस्टमेंट की रिटर्न को भी कई गुना बढ़ा सकते है। तो सवाल यह उठता है किसी भी म्यूचुअल फंड स्कीम में इन्वेस्ट करने से पहले ऐसी कौन सी बाते है जिनका ध्यान रखा जाये? आज के इस आर्टिकल ’Sahi Mutual Fund kaise chune’ में हम इन्ही बातो को जानेंगे। ताकि आपको अगर फाइनेंस की बहुत कम जानकारी भी हो तब भी आप एक बेहतर निर्णय ले पाए।

Mutual Fund me invest karte samey kin baato ka dhyan rakhe?

रिस्क (Risk): म्यूचुअल फंड की हर एक स्कीम का अपना एक रिस्क लेवल होता है जो की स्कीम डॉक्यूमेंट में riskometer के रूप में दर्शाया जाता है। इसी तरह इन्वेस्टर की उम्र और इनकम के हिसाब से भी रिस्क लेने की अपनी अपनी कैपेसिटी होती है। किसी भी स्कीम को चुनाव करते वक्त उसके रिस्क लेवल पर ज़रूर ध्यान दे। इक्विटी और इक्विटी से जुडी स्कीम्स ज्यादा रिस्क की कैटेगरी में आती है वही डेब्ट स्कीम्स में रिस्क काफी कम हो जाता है।

अगर आप भी जवान है, अच्छा कमा रहे है और लॉन्ग टर्म गोल के लिए इन्वेस्ट करना चाहते है तो इक्विटी यानि की हाई रिस्क हाई रिटर्न आपके लिए बेस्ट हो सकता है और अगर वही अगर आप रिटायरमेंट के करीब है जो ज्यादा रिस्क ना लेकर एक स्टेबल रिटर्न पाना चाहते है तो डेब्ट और मनी मार्किट फंड में निवेश कर सकते है।

इन्वेस्टमेंट गोल (Investment Goal): इन्वेस्टमेंट गोल यानि की आप किस उद्देश्य के लिए इन्वेस्टमेंट करना चाहते है। हर किसी के सपने और जरूरते अलग अलग होती है। किसी को बच्चो के शादी के लिए सेविंग करनी है या किसी को घर खरीदने के लिए इन्वेस्टमेंट करनी है। इसी तरह इनका टाइम पीरियड भी अलग अलग हो सकता है। अगर आप किसी निश्चित उद्देश्य के लिए इन्वेस्टमेंट कर रहे है उसी के अनुरूप स्कीम का चुनाव करे। जैसे की बच्चो की पढ़ाई और शादी आदि के लिए फंड AMC द्वारा चिल्डर्न करियर प्लान्स बनाये गए है वही दूसरी और अगर आप हाई रिटर्न या टैक्स सेविंग्स का लाभ उठाना चाहते है को इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम(ELSS) में इन्वेस्ट कर सकते है।

एंट्री और एग्जिट लोड (Entry and Exit load): काफी सारी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में अगर आप एक फिक्स्ड टाइम से पहले रिडेम्पशन लेते है, यानि की यूनिट को बेचते है, तो अपको एक निश्चित परसेंटेज के तौर पर कुछ चार्ज देना पड़ता है। ज्यादातर इक्विटी स्कीम्स में अगर आप एक साल से पहले रिडेम्पशन  लेते है तो आपको 1% तक का एग्जिट लोड भरना पड़ सकता है। हालांकि कुछ इक्विटी स्कीम्स में यह 1% से ज्यादा भी हो सकता है। इसलिए निवेश करते वक्त इस बात का जरूर ध्यान रखे की अगर किसी इमरजेंसी की स्तिथि में आपको जल्दी रिडेम्पशन भी लेना पड़े तो कम से कम चार्ज लगे और आप ज्यादा से ज्यादा रिटर्न का लाभ उठा पाएं।

डायरेक्ट और रेगुलर प्लान्स (Direct and Regular plans): आजकल बहुत सारी apps जैसे की Groww, Zerodha coin आदि निवेशक को बिना किसी एजेंट के चक्कर में पड़े सीधे इन्वेस्टमेंट करने की सुविधा देते है। डायरेक्ट प्लान एक तरह से बढ़िया है और लॉन्ग टर्म में यह आपकी इन्वेस्टमेंट की रिटर्न को बड़ा देता है क्युकी इसमें एजेंट की कमिशन शामिल नहीं होती। लेकिन, अगर आप एक नए इन्वेस्टर है और बाजार के बारे में बहुत कम जानकारी रखते है तो यही निर्णय आपकी रिटर्न को बढ़ाने की बजाये नुक्सान में भी ले जा सकता है।

इसलिए अपनी जानकारी और समझ के अनुसार ही कदम उठाये। अगर आपको फाइनेंशियल मार्किट की बहुत कम जानकारी है तो किसी एक्सपर्ट की सलाह से निवेश करना भी कोई बुरी बात नहीं है जो समय समय पर आपके पोर्टफोलियो को मार्किट की स्तिथि के अनुसार बैलेंस भी करता रहेगा।

एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratio): हर AMC एक म्यूचुअल फंड स्कीम को मैनेज करने के बदले कुछ फीस चार्ज करता है जो AMC के मैनेजमेंट खर्चो को पूरा करने के लिए जरुरी है। यह रेश्यो हर स्कीम की अलग होती है। इसलिए  म्यूचुअल फंड का चुनाव करते वक्त इस बात का भी ध्यान रखे की स्कीम के एक्सपेंस रेश्यो कम से कम हो। यह एक्सपेंस रेश्यो 0.80 से 2.80 % के बीच में हो सकती है जो समय समय में मैनेजमेंट के बदलाव के साथ साथ ही बदलती भी रहती है। कम एक्सपेंस रेश्यो इस बात की तस्दीक करता है की आपकी इन्वेस्टमेंट बहुत छोटा हिस्सा ही फंड हाउस खर्चो के लिए इस्तेमाल कर रहा है और ज्यादा से ज्यादा स्कीम मे इन्वेस्ट हो रहा है।

फंड परफॉर्मेंस (Fund Performance): किसी भी स्कीम मे इन्वेस्ट करने से पहले उसकी बीते साल की एव्रेज रिटर्न पर रिसर्च जरूर कर ले। हालाँकि यह स्कीम के फ्युचर परफॉरमेंस की कोई गारंटी नहीं देता फिर भी इस से फंड मैनेजर की काबिलियत के बारे मे अंदाज़ा लग जाता है। ऐसी म्यूचुअल फण्ड स्कीम का चुनाव करे जो लगातार पॉजिटिव रिटर्न दे रही हो चाहे वह कम ही क्यों ना हो।

मान लीजिये एक स्कीम ने हर साल 8% रिटर्न दे रही है वही दूसरी स्कीम ने एक साल में 25% अगले साल में -5% रिर्टन दिए है यानि की रिटर्न consistent नहीं है। इस केस में पहली स्कीम दूसरे से बेहतर है, क्यूंकी लॉन्ग टर्म में इसी स्कीम की रिटर्न पहले से बेहतर रहेंगे। इसके इलावा एसेट अलोकशन, स्कीम में शामिल स्टॉक्स आदि पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

म्यूचुअल फंड स्कीम की रिटर्न और अन्य रेश्यो को चेक करने के लिए आप नीचे बताए ऑनलाइन ब्रोकर्स की मदद ले सकते है। अगर आपने अभी तक म्यूचुअल फण्ड में इन्वेस्ट नहीं किया है और अपनी इन्वेस्टमेंट यात्रा की शुरुआत करना चाहते है, तो इनके जरिए आप घर बैठे आसानी से म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट भी कर सकते है।

ET Money

Groww

Zerodha Coin

Cams

यह भी जानिए: Mutual Fund kya hai? – जानिए म्यूचुअल फंड क्या है और कैसे काम करता है?

निष्कर्ष – Conclusion

म्यूचुअल फण्ड में इन्वेस्टमेंट करना अपने financial goal को हासिल करने के सफर में आपका बेहतरीन निर्णय हो सकता है। लेकिन इन्वेस्टमेंट चाहे कहीं भी या किसी भी एसेट में करनी हो, उस से पहले उसमे शामिल रिस्क, रिटर्न और अपने उद्देश्य के बारे में अच्छी तरह से विचार कर लेना जरुरी है। ऊपर बताई गयी बाते आपको एक अच्छा म्यूचुअल फण्ड चुनने में मदद करेगी। हालाँकि इस बात की कोई गारेंटी नहीं की सभी तरह के टिप्स फॉलो करने के बाद भी आपकी इन्वेस्टमेंट सिर्फ अच्छी रिटर्न ही दे। म्यूचुअल फण्ड में इन्वेस्टमेंट की रिटर्न काफी हद तक बाजार के उतार चढ़ाव और फण्ड मैनेजर के कार्यकुशलता ओर निर्भर करती है। इसी लिए जरुरी यही है की लॉन्ग टर्म थिंकिंग को अपनाकर चले और समय समय पर अपनी इन्वेस्टमेंट का रिव्यू करते रहें।

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