Mutual fund STP kya hai – जानिए STP क्या है और SIP से कैसे है अलग?

इन्वेस्टमेंट द्वारा एक अच्छी रिटर्न प्राप्त करने के लिए म्यूचुअल फंड एक बहुत अच्छा साधन है। यह अपको इक्विटी मार्किट की रिटर्न देने के साथ साथ ही आपके पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफी करने का काम भी करता है। म्यूचुअल फंड की रिटर्न का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने के लिए हम कई सारे तरीको को अपना सकते है। ऐसे ही एक तरीके का नाम है STP जो आपकी म्यूचुअल फंड की रिटर्न को बढ़ाने के साथ साथ आपके रिस्क को कम करने का काम भी करता है। आज के आर्टिकल “Mutual fund STP kya hai” के जरिए हम STP के काम करने के तरीके को पूरी तरह से जानते हुए इसके और SIP बीच अंतर को भी जानेंगे।

Mutual fund STP kya hai

म्यूचुअल फंड STP क्या है – Mutual Fund STP kya hai

STP का फुल फॉर्म है: Systematic Transfer Plan

म्यूचुअल फंड STP एक ऐसी फैसिलिटी है जिसमे इन्वेस्टर द्वारा निर्धारित की गई एक फिक्स्ड या फ्लेक्सिबल राशि दिए गए समय में एक म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरी स्कीम में ट्रांसफर की जाती है। इसके तहत इन्वेस्टर का पैसा एक ही AMC की म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरी स्कीम में ट्रांसफर किया जा सकता है और इसके लिए इंवेस्टर को बार बार एप्लिकेशन भी नही देनी पड़ती। SIP के समान ही इन्वेस्टर द्वारा एक ही बार में इंस्ट्रक्शन AMC को दिया जाता है जिसके बाद ऑटोमेटिकली STP की इंस्टॉलमेंट एक स्कीम से दूसरी में ट्रांसफर होने लगती है। STP से इन्वेस्टर को मुख्यता दो फायदे होते है, एक तो हर मार्किट स्तिथि में आपका पैसा सिस्टमेटिकली इन्वेस्ट होता रहता है और दूसरा आप के लंपसम पैसे पर भी मार्केट लिंक्ड रिटर्न का फायदा मिलता रहता है।

STP कितने प्रकार की होती है – STP kitne prakar ki hoti hai

STP को मुख्यता तीन भागो में विभाजित किया जाता है:

फिक्स्ड STP: जैसा की नाम से ही जाहिर है, STP की इस किस्म में एक फिक्स्ड अमाउंट को एक फिक्स्ड टाइम पीरियड के बाद एक स्कीम से दूसरी स्कीम में ट्रांसफर किया जाता है। यह अमाउंट इन्वेस्टर द्वारा निर्धारित की जाती है और STP के पूरे टेन्योर के दौरान एक सी ही रहती है।

फ्लेक्सिबल STP: इस तरह की STP में कितना फंड ट्रांसफर करना है और कब ट्रांसफर करना है यह इन्वेस्टर द्वारा मार्केट कंडीशन के अनुसार निर्धारित किया जाता है। स्टॉक मार्केट की चल रही स्तिथि के अनुसार इन्वेस्टर कम या ज्यादा अमाउंट को ट्रांसफर करने के बारे में निर्णय ले सकता है।

कैपिटल गेन STP: STP की इस किस्म में सिर्फ इन्वेस्टर की सोर्स स्कीम में पड़ी हुई इन्वेस्टमेंट पर मिली रिटर्न या कैपिटल गेन को दूसरी स्कीम में ट्रांसफर किया जाता है।

STP कैसे काम करती है – STP kaise kaam karti hai

STP द्वारा इन्वेस्टमेंट करने के लिए आपको तीन बातो को निर्धारित करना पड़ता है। पहला हैं सोर्स स्कीम जिसमे आप एकमुश्त पैसा इन्वेस्ट करते हो। दूसरा है टारगेट स्कीम जिसमे STP की इंस्टॉलमेंट को एक निश्चित समय में ट्रांसफर किया जाता है और तीसरा वह राशि जिसे आपने STP के तहत ट्रांसफर करना है जो एक फिक्स्ड या फ्लेक्सिबल रकम हो सकती है।

सोर्स स्कीम के लिए आपको डेब्ट कैटेगरी के एक ऐसे फंड का चुनाव करना चाहिए जिसमें रिस्क और volatility कम हो और पैसे निकलवाने पर किसी भी तरह का एक्जिट लोड ना भरना पड़ता हो। एग्जिट लोड का ध्यान इसलिए रखा जाता है क्युकी STP में यूनिट को एक स्कीम से रिडीम करके उसी पैसों से दूसरी स्कीम के यूनिट खरीदे जाते है।

इसके बाद इन्वेस्टर उस रकम को निर्धारित करता है जिसे वह एक बार में डेब्ट स्कीम में इन्वेस्ट करना चाहता है। डेट स्कीम में इन्वेस्टमेंट होने के बाद STP इंस्टॉलमेंट को टारगेट में स्कीम ट्रांसफर करने के लिए AMC को एक रिक्वेस्ट दी जाती है जिसके बाद पैसा सिस्टमेटिकली ट्रांसफर होने लग जाता है। विभिन्न AMC की म्यूचुअल फंड स्कीम में तुलना और उनमें इन्वेस्ट करने के लिए आप ऑनलाइन प्लेटफार्म जैसे की groww, etmoney आदि का प्रयोग कर सकते है।

STP के लाभ – STP ke labh

Cost Averaging: STP के जरिए इन्वेस्टमेंट करने पर इन्वेस्टर को rupee cost averaging का फायदा मिलता है। यानी की म्यूचुअल फंड के यूनिट तब खरीदे जाते है जब उनका एवरेज प्राइस कम होता है लेकिन बेचने के समय उसका मार्केट प्राइस ज्यादा होने के कारण अपको अच्छी रिटर्न मिलती है।

ज्यादा रिटर्न: STP आपको अपनी इन्वेस्टमेंट पर ज्यादा रिटर्न अर्जित करने में मदद करता है। इसमें आपका पैसा कम रिस्की स्कीम से ऐसी स्कीम में ट्रांसफर किया जाता है जिसमे रिटर्न की संभावना ज्यादा होती है। लंबे समय तक इन्वेस्टमेंट के रहने पर उसपे मिलने वाली रिटर्न भी कई गुना तक बढ़ जाती है।

पोर्टफोलियो बैलेंसिंग: STP इन्वेस्टमेंट मोड में आपके पोर्टफोलियो में डेब्ट और इक्विटी दोनो का ही मिक्सचर होता है जिस कारण यह आपके पोस्टफोलियो की रिस्क और रिटर्न दोनो का बैलेंस बनाए रखने में मदद करता है।

STP द्वारा इन्वेस्ट करने पर ध्यान रखने योग्य बातें – STP dwara investment karne par dhyan rakhne yogya baate

STP द्वारा इन्वेस्टमेंट आपके रिस्क को कम और रिटर्न को ज्यादा रखने के उद्देश्य से की जाती है, लेकिन यहां इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है की यह सभी लोगो के उपयुक्त नहीं है। अपको इसके द्वारा इन्वेस्टमेंट करने से पहले अपने उद्देश्य के बारे में पता होना चाहिए। नीचे दिए पॉइंट्स अपको इस बात को समझने में मदद करेंगे।

  • STP द्वारा इन्वेस्टमेंट को तभी करे जब आप लॉन्ग टर्म के लिए उसमे invested रहना चाहते है। एक स्कीम में इन्वेस्ट किया गया एकमुश्त पैसा दूसरी स्कीम में ट्रांसफर होने में समय लगता है और दूसरी स्कीम से एक अच्छी रिटर्न अर्जित करने के लिए उसमे कम से कम 3 से 5 साल के लिए invested रहना जरूरी है।
  • STP की सोर्स स्कीम का चुनाव सोच समझ कर ही करे। आमतौर पर इसके लिए शॉर्ट टर्म या लिक्विड फंड का चुनाव किया जाता है जिसमे volatility और रिस्क कम होता है और शॉर्ट टर्म में पैसा निकालने पर कोई भी एग्जिट लोड नही भरना पड़ता।
  • STP द्वारा इन्वेस्टमेंट करने पर उसपे एप्लिकेबल टैक्सेशन का भी ध्यान रखे। चूंकि STP में पैसा एक स्कीम से रिडीम करके दूसरी में ट्रांसफर किया जाता है इस कारण होने वाले लॉन्ग या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन अनुसार टैक्स लागू हो सकता है।
  • STP द्वारा इन्वेस्टमेंट करने पर मार्किट की चल रही स्तिथि को भी ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। अगर आपको इस विषय में पूरी जानकारी नहीं भी है तो एक बार अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से जरूर सलाह ले लें।
  • SEBI द्वारा STP की एक स्कीम से दूसरी स्कीम में मिनिमम 6 इंस्टॉलमेंट को निर्धारित किया गया है। इस बात को भी इन्वेस्टमेंट करने से पहले जरूर ध्यान में रखे।

SIP और STP में क्या अंतर है – SIP aur STP me kya antar hai

SIP    STP
SIP में आपका पैसा एक फिक्स्ड तारीख को आपके बैंक अकाउंट से म्यूचुअल फंड स्कीम इन्वेस्ट किया जाता है। STP में आपका पैसा एक म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरी म्यूचुअल फंड स्कीम से आपके द्वारा निर्धारित तारीख को ट्रांसफर किया जाता है।
SIP उन लोगो के लिए उपयुक्त है जिनके पास इन्वेस्टमेंट के लिए एकमुश्त राशि नहीं और थोड़ा थोड़ा करके म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करना चाहते है। STP उन लोगो के लिए उपयुक्त है जिनके पास एकमुश्त पैसा है, और STP के जरिए इन्वेस्टमेंट करके वह मार्केट साइकिल का लाभ उठाते हुए कम रिस्क और हाई रिटर्न दोनो का फायदा उठा सकते है।
SIP इन्वेसमेंट पर कोई टैक्स नहीं लगता लेकिन रिडेम्शन लेने पर होने वाले मुनाफे पर कैपिटल गेन टैक्स एप्लीकेबल हो सकता है। STP द्वारा एक फंड से पैसा दूसरे फंड में इन्वेस्ट करने पर कैपिटल गेन टैक्स एप्लिकेबल हो सकता है।
SIP में हमे कंपाउंडिंग, rupee cost averaging और नियमित इन्वेस्टमेंट से होने वाले बेनिफिट मिलते है। STP में हमे rupee cost average, बैलेंस्ड पोर्टफोलियो और ज्यादा रिटर्न के फायदे मिलते है।

यह भी जाने: Expense ratio kya hai – जानिए यह आपकी इन्वेस्टमेंट पर कैसे असर डालता है

निष्कर्ष – Conclusion

म्यूचुअल में अच्छी रिटर्न पाने के लिए कई सारी स्ट्रेटरजी और प्लान उपलब्ध है जिनमे STP का अपना एक अलग स्थान है। हालांकि इसके द्वारा इन्वेस्टमेंट करने से पहले हमे अपने लॉन्ग टर्म उद्देश्य और रिस्क प्रोफाइल पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है क्युकी यह प्लान हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं है।

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