Leverage trading meaning in hindi – लीवरेज ट्रेडिंग क्या है और कैसे काम करती है

स्टॉक मार्केट और फाइनेंशियल जगत में ’लीवरेज ट्रेडिंग’ एक महत्वपूर्ण टर्म है जो हमे अक्सर सुनने को मिलती है। लीवरेज ट्रेडिंग लोगो को अपने ट्रेडिंग के लिए उधार ली गई अमाउंट का इस्तेमाल करके ज्यादा रिटर्न अर्जित करने का मौका देता है। हालांकि, इस ज्यादा रिटर्न के साथ ज्यादा जोखिम भी शामिल होता है। इस आर्टिकल ’Leverage trading meaning in hindi’ में हम, लीवरेज ट्रेडिंग क्या है, यह कैसे काम करता है, इसके फायदे, और इससे जुड़ी चुनौतियों को विस्तार से समझेंगे।

Leverage trading meaning in hindi
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लीवरेज ट्रेडिंग क्या होती है – Leverage trading meaning in hindi

स्टॉक मार्केट लीवरेज ट्रेडिंग में एक ऐसा तरीका है जिसे इस्तेमाल करके ट्रेडर्स अपनी कैपिटल से कहीं ज्यादा पैसे से ट्रेडिंग कर पाते है। इसमें इन्वेस्टर अपने ट्रेडिंग अकाउंट में पड़े कैपिटल के ऊपर अपने ब्रोकर से उधार यानी की लीवरेज लेकर ट्रेडिंग कर सकते है। इससे उन्हें मार्केट में बड़ी पोजीशन बनाने में मदद मिलती हैं जिससे होने वाला प्रॉफिट भी उतना ही बढ़ जाता है। यह तकनीक उन ट्रेडर्स के लिए फायदेमंद है जो अपने शॉर्ट-टर्म गेन्स को बढ़ाना चाहते हैं।

लीवरेज ट्रेडिंग में एक्सपीरियंस और मार्केट नॉलेज का होना बहुत ज़रूरी है। अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह बहुत कम समय में ज्यादा प्रॉफिट कमाने के लिए बहुत अच्छा टूल बन सकता है। लेकिन इस बात पर ध्यान देना भी जरूरी है की प्रॉफिट को बढ़ाने के साथ साथ ही यह लॉस की संभावना को भी उतना ही बड़ा देता है। इसलिए इन्वेस्टमेंट करने से पहले अच्छी तरह से रिसर्च करना और रिस्क को मैनेज करने को सीखना ज़रूरी है।

लीवरेज ट्रेडिंग कैसे काम करती है – Leverage trading kaise kaam karti hai

लीवरेज एक तरह से पैसे उधार लेने का प्रोसेस है जिससे आप अपनी ट्रेडिंग पोजीशन को अपने पूरे कैपिटल से ज्यादा बढ़ा सकते हैं। चलिए जानते है की यह कैसे काम करती है:

लीवरेज रेश्यो: ट्रेडर्स लीवरेज रेश्यो (उदाहरण: 10:1, 50:1) का इस्तेमाल करके यह तय करते हैं कि वे अपने खुद के कैपिटल पर ब्रोकर से कितने गुना उधार ले सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर आपका ब्रोकर अपको 5x लीवरेज ऑफर कर रहा है और आपके ट्रेडिंग अकाउंट में 10,000 रुपए है तो आप 10,000 रुपए को मार्जिन के रूप में रखकर 50,000 तक का ट्रेड ले सकते है।

मार्जिन: जब आप एक लीवरेज पोजीशन खोलते हैं, तो आप पूरे मौजूदा मूल्य के एक हिस्सा को कोलेटरल के रूप में रखते हैं और बाकी का भाग ब्रोकर से उधार लिया जाता है। कोलेटरल के रूप में रखे गए पैसे को मार्जिन कहते है।

प्रॉफिट और लॉस: लीवरेज का इस्तेमाल करके आप अपनी ट्रेडिंग पोजीशन को बना सकते है। लीवरेज ना केवल आपके प्रॉफिट को बढ़ाता है, बल्कि इससे ज्यादा लॉस होने की संभावना भी उतनी ही ज्यादा हो जाती है। इसलिए लीवरेज का इस्तेमाल तभी करे जब आपको शेयर मार्केट का अच्छा अनुभव हो और आप अपनी पोजीशन को सही समय पर क्लोज करने और रिस्क को मैनेज करने में अच्छे हो।

लीवरेज ट्रेडिंग कहां इस्तेमाल होती है – Leverage trading kahan istemaal hoti hai

स्टॉक मार्केट: स्टॉक मार्केट में लीवरेज का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है। यहां पर ट्रेडर्स अपने कैपिटल पर लीवरेज का इस्तेमाल बड़ी से बड़ी ट्रेडिंग पोजीशन को बनाने में करते है जिससे वह कम पैसे में भी ज्यादा प्रॉफिट कमा पाए।

कमोडिटी मार्केट: कमोडिटी यानी की वह मार्केट जहां पर कमोडिटी जैसे की सोने, चांदी, ऑयल, कॉटन आदि की ट्रेडिंग की जाती है। स्टॉक मार्केट के समान ही कमोडिटी मार्केट यानी की MCX में भी लीवरेज का उपयोग होता है।

फॉरेक्स मार्केट: फॉरेक्स मार्केट में अलग अलग देशों की करंसी की ट्रेडिंग करके प्रॉफिट कमाया जाता है, और यहां भी ट्रेडर्स काफी हद तक लीवरेज का इस्तेमाल करते है।

लीवरेज ट्रेडिंग के फायदे – Leverage trading ke fayde

ज्यादा प्रॉफिट: लीवरेज के माध्यम से आप अपने ट्रेडिंग पोजीशन को बढ़ा सकते है। अगर ट्रेड आपके फायदे में जाता है, तो आप कम कैपिटल में भी कई गुना तक प्रॉफिट कमा सकते है।

कम कैपिटल में बड़ी इन्वेस्टमेंट: अगर आपके पास ट्रेडिंग करने के लिए ज्यादा कैपिटल नही भी है तो आप लीवरेज के माध्यम से टेंपररी रूप से कैपिटल को बड़ा सकते है और मार्केट में दिखने वाले अच्छे अवसर का लाभ उठा सकते है।

ब्रोकर से उधार: लीवरेज के माध्यम से आप अपने ब्रोकर से पैसे उधार ले सकते हैं। इस तरह आप उनसे मिलने वाली सभी सर्विसेज का पूरा लाभ उठा सकते है।

विभिन्न फाइनेंशियल बाजार में उपयोगी: लीवरेज ट्रेडिंग का उपयोग आप स्टॉक मार्केट सहित कई और मार्केट, जिनमे कमोडिटी मार्केट, फॉरेक्स मार्केट आदि में कर सकते है।

मार्केट वॉलेटिलिटी का फायदा: लीवरेज ट्रेडिंग के कारण पोजीशन के बढ़ने पर अपको बड़ी अमाउंट का टारगेट नही रखना पड़ता। अगर मार्केट वोलेटाइल हो तो छोटे से मूव को कैप्चर करके  भी आप अच्छा प्रॉफिट कमा सकते है।

लीवरेज ट्रेडिंग के नुकसान – Leverage trading ke nuksaan

अधिक रिस्क: लीवरेज ट्रेडिंग के आपका रिस्क कई गुना तक बढ़ जाता है। अगर ट्रेड आपके फेवर में नहीं जाता है, तो आपके कैपिटल को बड़ा नुकसान हो सकता है।

मार्किट एक्सपर्टाइज: लीवरेज के साथ ट्रेडिंग करने के लिए आपको शेयर मार्केट की अच्छी जानकारी और एक्सपीरियंस होना चाहिए जिससे आप विपरीत परिस्थिति में भी अपने ट्रेड को संभालते हुए कम से कम लॉस में उस से बाहर आ सकें।

मार्जिन ट्रेडिंग और लीवरेज ट्रेडिंग में फर्क – Margin trading aur leverage trading me fark

मार्जिन और लीवरेज दोनो टर्म्स को अक्सर एक दूसरे के बदले इस्तेमाल कर लिया जाता है लेकिन इन दोनो में बहुत अंतर है। मार्जिन ट्रेडिंग में ट्रेडर अपने पास कैपिटल ना होने की स्तिथि में डीमैट अकाउंट में अपने पड़े हुए शेयर्स को pledge करके ब्रोकर से उधार ले सकता है। यह उधार pledge किए गए शेयर को वैल्यू पर निर्भर करता है, जिसके बदले इन्वेस्टर कुछ इंट्रेस्ट की पेमेंट भी करनी पड़ती है।

दूसरी तरफ लीवरेज ट्रेडिंग में जब ट्रेडर अपनी कोई पोजीशन बनाता है तो उसे अपने कैपिटल का कुछ हिस्सा ब्रोकर के पास कोलेटरल के रूप में रखना पड़ता है। इसी के आधार पर वह अपने कैपिटल से ज्यादा का ट्रेड मार्केट में ले पाता है। लीवरेज ट्रेडिंग का इस्तेमाल अक्सर इंट्रा डे इक्विटी या ऑप्शन और फ्यूचर में किया जाता है और यह ट्रेडर के फायदे और नुकसान को कई गुना तक बढ़ा देता है।

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निष्कर्ष – Conclusion

फाइनेंशियल मार्केट में लीवरेज के अपने फायदे और नुकसान है। छोटे और बड़े दोनो इन्वेस्टर्स को यह कम समय में अपने मुनाफे को कई गुना तक बढ़ाने की क्षमता देता है। वह लोग जिनके पास कम कैपिटल है, उनके लिए यह बहुत उपयोगी साधन है। लेकिन इसका बिना सोचे समझे इस्तेमाल भी हमारे लिए नुकसानदायक है। इसलिए जरूरी है की पहले स्टॉक मार्केट का जरूरी एक्सपीरियंस और जानकारी को इक्ट्ठा करे और अगर किसी ट्रेड के सही दिशा में जाने की अच्छी संभावना हो तभी उसमे लीवरेज का इस्तेमाल कर के एंट्री लें।

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