India VIX meaning in hindi – इंडिया VIX क्या है और कैसे समझें?

स्टॉक मार्केट में इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग करने वालों को बाजार को प्रभावित करने वाले कई फैक्टर्स को ध्यान में रखकर हर कदम उठाना पड़ता है। ऐसे ही फैक्टर में इंडिया VIX भी काफी अहम भूमिका निभाता है। यह उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो बाजार के उतार-चढ़ाव को समझने की कोशिश करते हैं। इंडिया VIX बाजार की वोलेटिलिटी को मापने वाला एक इंडेक्स है। इस आर्टिकल ’India VIX meaning in Hindi’ में हम इंडिया VIX क्या है, यह कैसे काम करता है, और इन्वेस्टर्स के लिए इसका क्या महत्व है, इसे विस्तार से समझेंगे।

India VIX meaning in hindiइंडिया VIX क्या है – India VIX meaning in Hindi

भारतीय शेयर मार्केट दुनिया की अन्य मार्किट की तरह ही अनिश्चितता से भरा हुआ है। इस अनिश्चितता का माप करने के लिए एक खास टूल है, जिसे हम इंडिया VIX के नाम से जानते हैं। VIX, यानी ‘वोलेटिलिटी इंडेक्स’, को ‘फियर गेज’ या ‘फियर इंडेक्स’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह बाजार की भविष्य में होने वाली गतिविधियों और वोलेटिलिटी का एक माप है।

इंडिया VIX, जो कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के ऑप्शंस की प्राइसिंग पर आधारित होता है, यह दर्शाता है कि अगले 30 दिनों में बाजार की वोलेटिलिटी क्या होगी। अगर इंडिया VIX का प्राइस ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि बाजार में अधिक वोलेटिलिटी की उम्मीद है और इसके विपरीत, कम VIX प्राइस का मतलब है कि बाजार के स्थिर रहने की संभावना ज्यादा है।

इन्वेस्टर्स और ट्रेडर्स के लिए, इंडिया VIX एक महत्वपूर्ण टूल है। यह उन्हें मार्केट से जुड़े संभावित रिस्क को समझने और अपने पोर्टफोलियो को उस हिसाब से एडजस्ट करने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, यदि आपको लगता है कि आने वाले समय में बाजार में गिरावट आएगी, तो आप इंडिया VIX के अधिक होने पर अपनी इन्वेस्टमेंट को सुरक्षित करने के लिए कदम उठा सकते हैं।

इंडिया VIX कैसे काम करता है – India VIX kaise kaam karta hai

शेयर मार्किट की चाल को समझना एक मुश्किल काम है, और इसे समझने के लिए और उसमे महारत हासिल करने के लिए एक महत्वपूर्ण टूल है, इंडिया VIX, इसलिए इस बात को जान लेना भी जरूरी है की इंडिया VIX कैसे काम करता है। इंडिया VIX की कैलकुलेशन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के ऑप्शन ट्रेडिंग डेटा के आधार पर की जाती है। इसका प्राइस इस बात को बताता है, कि अगले 30 दिनों में बाजार में कितनी वोलेटिलिटी हो सकती है।

जब इंडिया VIX का प्राइस ज्यादा होता है, तो यह इशारा करता है कि बाजार में अधिक अस्थिरता है और इन्वेस्टर्स को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। इसके विपरीत, जब VIX का प्राइस कम होता है, तो यह संकेत देता है कि बाजार स्थिर है और इन्वेस्टर्स के लिए यह एक अच्छा समय हो सकता है।

इस तरह, इंडिया VIX इन्वेस्टर को बाजार की अस्थिरता के प्रति एडवांस में चेतावनी प्रदान करता है, जिससे वे अपने इन्वेस्टमेंट के निर्णयों को और अधिक सूझबूझ से ले सकते हैं। यह उन्हें बाजार की वोलेटिलिटी से बचने और अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने में मदद करता है। इंडिया VIX, यह सिर्फ एक संकेतक नहीं, बल्कि बाजार की गहराई को समझने का एक जरिया है।

इंडिया VIX क्यों महत्वपूर्ण है – India VIX kyu mahatvpurn hai

नीचे पाँच मुख्य कारण दिए गए हैं जो इंडिया VIX को महत्वपूर्ण बनाते हैं:

मार्किट की वोलेटिलिटी का अनुमान: इंडिया VIX मार्केट की वोलेटिलिटी का सटीक अनुमान लगाने में मदद करता है। यह मार्किट सेंटीमेंट को समझने और इन्वेस्टर को मार्केट के संभावित उतार-चढ़ाव के लिए तैयार करता है, जिससे वे अपने इन्वेस्टमेंट के फैसलों को और अधिक सोच-समझकर ले सकते हैं।

रिस्क मैनेजमेंट: इंडिया VIX इन्वेस्टर्स को उनके रिस्क को मैनेज करने में मदद करता है। यह उन्हें बाजार की अस्थिरता के आधार पर अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस करने की दिशा देता है। 

इन्वेस्टमेंट प्लानिंग में सहायक: इंडिया VIX इन्वेस्टर्स को उनकी इन्वेस्टमेंट प्लानिंग करने में मार्गदर्शन प्रदान करता है। ज्यादा वोलेटिलिटी की संभावना के केस में शॉर्ट टर्म इन्वेस्टर बड़ी पोजीशन लेने से बच सकते है, जबकि कम वोलेटिलिटी में इन्वेस्टर के पास बड़ी पोजीशन बनाने का अच्छा मौका होता है।

हेजिंग की रणनीति मे सहायक: आमतौर पर इंडिया VIX शॉर्ट टर्म इन्वेस्टर को ज्यादा प्रभावित करती है, लेकिन बड़े और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर के लिए भी यह काफी मददगार हो सकता है। जब बाजार में वोलेटिलिटी ज्यादा होती है, तो इंडिया VIX निवेशकों को हेजिंग की रणनीति अपनाने में मदद करता है। इसके अंतर्गत वह अपने पास पड़े स्टॉक के बराबर ही ऑप्शन या फ्यूचर के कॉन्ट्रैक्ट को buy या sell कर सकते है, जिसके कारण अगर एक तरफ से उन्हें नुकसान भी हो रहा हो, तो वह उसे इस रणनीति की मदद से आसानी से कवर कर सकते है।

बाजार के सेंटीमेंट का आकलन: इंडिया VIX बाजार के मनोभाव का आकलन करने में सहायक होता है। यह इन्वेस्टर के बीच में डर और लालच की भावना का पता लगाने में मदद करता है, जिससे हम ज्यादा बेहतर इन्वेस्टमेंट निर्णय ले सकते हैं।

इंडिया VIX कैसे कैलकुलेट किया जाता है – India VIX ko kaise Calculate Kiya jaata hai

इंडिया VIX की कैलकुलेशन एक कॉम्प्लेक्स मैथमेटिकल मॉडल द्वारा की जाती है, जिसे Black Scholes (B&S) मॉडल के नाम से जाना जाता है। इस मॉडल का इस्तेमाल मुख्यता डेरिवेटिव, जैसे की ऑप्शन के प्राइस को निर्धारित करने के लिए किया जाता है, जिसके लिए उसको प्रभावित करने वाले कारकों की प्राइस कैलकुलेशन का इस्तेमाल होता है। इंडिया VIX की कैलकुलेशन के लिए कई सारे कारकों को ध्यान में रखा जाता है, जिनकी मदद से मार्केट में आने वाले 30 दिनों की संभावित वोलेटिलिटी का अंदाजा लगाया जाता है। इन्ही कारकों के बारे में नीचे बताया गया है:

मार्किट प्राइस: मार्केट प्राइस, यानि निफ्टी 50 इंडेक्स और इसमें मौजूदा समय में शामिल स्टॉक का चल रहा प्राइस। यह प्राइस लेटेस्ट उपलब्ध डाटा के आधार पर लिया जाता है।

स्ट्राइक प्राइस: स्ट्राइक प्राइस, यानी की वह प्राइस जिसपे निफ्टी के एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट को खरीदा और बेचा जाता है। निफ्टी के वर्तमान प्राइस के अनुसार यह In the money, Out of the money या At the money हो सकते है। इंडिया VIX की कैलकुलेशन के लिए Out of the money ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के प्राइस का इस्तेमाल किया जाता है।

टाइम to एक्सपायरी: यह वह समय काल है, जिसके बाद निफ्टी का ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायर या invalid हो जाता है, यानी की उसकी वैल्यू जीरो हो जाती है। यह एक्सपायरी टाइम, एक हफ्ते और एक महीने का होता है।

वोलेटिलिटी: यह सबसे जरूरी कारक है, जो इंडेक्स में अगले 30 दिनों में हो सकने वाले प्राइस में बदलाव को दर्शाता है। इसे निफ्टी 50 इंडेक्स के ऑप्शन प्राइस के आधार पर कैलकुलेट किया जाता है।

रिस्क फ्री रेट: यह सरकारी बॉन्ड्स पर मिलने वाली यील्ड को दर्शाता है। इन बॉन्ड में इन्वेस्टमेंट को रिस्क फ्री और सुरक्षित माना जाता है, और इसी लिए इसकी तुलना VIX कैलकुलेशन में अहम योगदान करती है। इन्हे बेंचमार्क मान कर इंडिया VIX की तुलना इनसे की जाती है जिसमे 30 से 90 दिन में मैच्योरिटी वाले बॉन्ड का इस्तेमाल किया जाता है।

इंडिया VIX का कैलकुलेशन फॉर्मूला है:

India VIX = 100 * √((Sum[Weighted Implied Volatility Squared])/Total Weight)

इंडिया VIX और निफ्टी में क्या संबध है – India VIX aur Nifty me kya sambandh hai

इंडिया VIX और निफ्टी, दोनो हो भारतीय शेयर मार्किट के मुख्य संकेतक है। इंडिया VIX मार्किट की वोलेटिलिटी को दर्शाता है, और निफ्टी, शेयर मार्केट के मुख्य 50 स्टॉक के प्रदर्शन को दर्शाता है। यह दोनो एक तरीके से आपस में जुड़े हुए है, और एक दूसरे पर निर्भर भी है। आइए इस संबध को नीचे दिए तथ्यों की मदद से समझते है:

  • इंडिया VIX और निफ्टी दोनो की डायरेक्शन विपरीत होती है। जब VIX बढ़ता है, तो निफ्टी में गिरावट आती है, और जब VIX घटता है, तो निफ्टी में तेजी आती है।
  • इंडिया VIX के प्राइस का बढ़ना, मार्किट में आने वाली, और चल रही वोलेटिलिटी और रिस्क का संकेत देता है, जिससे ट्रेडर और इन्वेस्टर निफ्टी डेरिवेटिव और स्टॉक में इन्वेस्टमेंट करने से बच सकते है।
  • इंडिया VIX का घटना और बढ़ना, मार्किट में लिक्विडिटी के बढ़ने और घटने की और भी संकेत करता है। ज्यादा वोलेटिलिटी होने के कारण ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग में वॉल्यूम में इजाफा होता है, जिससे लिक्विडिटी में भी बढ़ोतरी होती है।
  • इंडिया VIX को ध्यान में रखते हुए ट्रेडर और इन्वेस्टर, निफ्टी डेरिवेटिव और स्टॉक में अपनी स्ट्रेटजी को बनाते है। ज्यादा VIX में इन्वेस्टर रिस्क को कम करने के लिए स्ट्रेटजी, और कम VIX में इन्वेस्टर ज्यादा रिस्की स्ट्रेटजी का इस्तेमाल कर सकते है।

इस तरह इंडिया VIX और निफ्टी के बीच का संबध इन्वेस्टर को मार्किट की गतिविधियों को समझने और उसी अनुसार अपने निर्णय लेने में मदद करता है।

इंडिया VIX को कैसे समझें – India VIX ko kaise samjhe

इंडिया VIX को समझना बहुत ही आसान है। इसे समझने के लिए हमे सिर्फ इसके प्राइस को ध्यान में रखना पड़ता है। यह शेयर मार्किट में अगले 30 दिनों में हो सकने वाली वोलेटिलिटी को दर्शाता है। जब VIX का प्राइस ज्यादा होता है, तो यह दर्शाता है कि मार्किट में वोलेटिलिटी ज्यादा है और इन्वेस्टर को सतर्क रहना चाहिए। इसका मतलब है कि मार्किट में भारी उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। दूसरी तरफ अगर VIX का प्राइस कम है, तो यह मार्किट की स्थिरता को दर्शाता है। निवेशकों के लिए यह एक अच्छा समय हो सकता है क्योंकि बाजार कम रिस्की होता है।

इंडिया VIX का प्राइस बाजार के दिशा के विपरीत चलता है। अगर VIX बढ़ रहा है, तो बाजार में गिरावट आ सकती है और अगर VIX घट रहा है, तो बाजार में तेजी आ सकती है। इन्वेस्टर्स को चाहिए कि वे VIX के प्राइस के आधार पर अपनी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजी को तैयार करें। ज्यादा VIX मूल्य पर रिस्क कम करने की रणनीति और कम VIX मूल्य पर इन्वेस्टमेंट बढ़ाने की रणनीति अपनानी चाहिए। इंडिया VIX के इतिहास को देखकर इन्वेस्टर यह समझ सकते हैं कि बाजार में किस प्रकार की अस्थिरता रही है और भविष्य में क्या संभावनाएं हो सकती हैं। यह उन्हें बाजार की उथल-पुथल से बचने और अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी निर्णय लेने में मदद करता है।

इंडिया VIX की नॉर्मल रेंज – India VIX ki normal range

इंडिया VIX की नॉर्मल रेंज, यानी की वह प्राइस रेंज जिसमे इंडिया VIX का प्राइस ज्यादातर ट्रेड करता है। इंडेक्स के हर स्टॉक की तरह ही इसका प्राइस, ट्रेडिंग समय के दौरान हर सेकंड बदलता है, और इसमें हो रहा बदलाव निफ्टी के ऑप्शन डाटा और बाजार में मौजूद वोलेटिलिटी पर आधारित होता है।

India VIX meaning in hindi
Image source: TradingView

अगर आप इंडिया विक्स के चार्ट को देखें तो आप इस बात का अंदाजा लगा पाएंगे की इंडिया VIX को नॉर्मल रेंज 10 से 30 के बीच में रही है। यानी की यह, वह प्राइस जोन है, जिसके बीच में इंडिया विक्स का प्राइस आमतौर पर ट्रेड करता है। इस रेंज में से भी इंडिया VIX का मूल्य 12 से 20 के बीच में सामान्य माना जाता है। यानी इस रेंज में, मार्किट में स्थिरता होती है और इन्वेस्टर बिना ज्यादा डर के शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग कर पाते है।

अगर VIX का मूल्य 20 से ऊपर जाता है, तो इसे मार्किट में बढ़ती हुई वोलेटिलिटी का संकेत माना जाता है। इस स्थिति में, इन्वेस्टर्स को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। वहीं, जब VIX का मूल्य 12 से नीचे आता है, तो इसे मार्किट की कम अस्थिरता का संकेत माना जाता है। यह इन्वेस्टर के लिए पैसे इन्वेस्ट करने का एक अच्छा समय हो सकता है, क्युकी आने वाले समय में मार्किट में तेजी देखी जा सकती है।

इंडिया VIX का इस्तेमाल ट्रेडिंग के लिए कैसे करें – India VIX ka istemaal trading ke liye kaise karen

इंडिया VIX, शेयर मार्केट में अगले 30 दिनों में हो सकने वाली वोलेटिलिटी को जानने में मदद करता है। लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म, दोनो तरह के इन्वेस्टर को इससे बाजार की भविष्य को हो सकने वाली स्तिथि का अंदाजा लगाने में मदद मिलती है। हालांकि अगर आप एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर है, तो आपको इससे कुछ खास फर्क नही पड़ना चाहिए, क्युकी आपको शॉर्ट टर्म में हो रही मार्किट वोलेटिलिटी को ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नही होती। लेकिन अगर इंडिया VIX, लंबे समय से बढ़ता ही चला आ रहा हैं, तो आपको अपने पोर्टफोलियो में कुछ जरूरी बदलाव करने पड़ सकते है।

एक लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर की तुलना में शॉर्ट टर्म इन्वेस्टर को इंडिया VIX पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, क्युकी इंडिया VIX की गतिविधि के अनुसार ही वह अपनी ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग पोजीशन को बना सकते है। इंडिया VIX का प्राइस ज्यादा होने के केस में उसकी ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग पोजीशन में शामिल रिस्क और लॉस की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि इंडिया VIX को ध्यान में रखकर शेयर मार्केट में कारोबार करना इस बात की गारंटी नहीं देता की आप हमेशा लॉस से बचे रहेंगे या आपका रिस्क कम ही रहेगा, हां, यह आपको आने वाले समय में मार्केट में हो सकने वाली वोलेटिलिटी का माप जरूर देता है, जिससे आप कुछ हद तक उस से बचने के लिए जरूरी कदम उठा सकते है।

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निष्कर्ष – Conclusion

इंडिया VIX सिर्फ एक नंबर नही है, यह NSE और पूरे स्टॉक मार्केट की स्तिथि को दर्शाने वाले एक इंडिकेटर की तरह है। इसे और इसके महत्व को समझ कर हम अपने इन्वेस्टमेंट निर्णय और ज्यादा सटीक बना सकते है, और इससे मार्किट के साइकिल को समझने में भी हमे मदद मिलती है। चाहे आप एक ट्रेडर हो या इन्वेस्टर, या फिर स्टॉक मार्केट के प्रति सिर्फ आकर्षित ही क्यों ना हो, इंडिया VIX का अध्यन और इसे समझना, हमारे फाइनेंशियल ज्ञान में इजाफा करने के साथ साथ ही हमे मार्किट को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।

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