CVV full form in Hindi – जानिए CVV कोड क्या है और क्यों जरूरी है

जब कभी भी हम कोई ऑनलाइन पेमेंट कार्ड द्वारा करते है तो हमें कार्ड से जुडी कई डिटेल्स मर्चेंट साइट पर भरनी पड़ती है, जैसे की कार्ड होल्डर का नाम, कार्ड नंबर, OTP आदि। इसी के साथ एक जरुरी कोड जिसकी हमे जरुरत होती है वह है CVV कोड। CVV कोड डेबिट या क्रेडिट कार्ड के पीछे छपा कोड होता है जिसे हमे ऑनलाइन पेमेंट करते समय भरने की जरुरत पड़ती है। लेकिन क्या आपको यह पता है की आखिर यह छोटा सा कोड करता क्या है और हमेशा इसे सुरक्षित और शेयर ना करने की सलाह क्यों दी जाती है। आज के इस आर्टिकल में हम CVV कोड से जुडी सभी जरुरी जानकारी को आपके सामने रखेंगे और जानेंगे की यह किस तरह से ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम में एक अहम् भूमिका निभाता है।

CVV full form in hindi

CVV कोड क्या है – CVV full form in Hindi

CVV कोड का फुल फॉर्म होता है: कार्ड वेरिफिकेशन वैल्यू – CARD VERIFICATION VALUE
हिंदी में हम कह सकते है: कार्ड जाँच मूल्य

CVV कोड को CSC (CARD SECURITY CODE) और CVC (CARD VERIFICATION CODE) कोड के नाम से भी जाना जाता है। यह डेबिट या क्रेडिट के पीछे मैग्नेटिक स्ट्रिप के साथ छपा 3 या 4 चार अंको का एक कोड होता है जिसका इस्तेमाल कार्ड द्वारा की जाने वाली ऑनलाइन पेमेंट के समय किया जाता है। यह इस बात को ऑथॉरिज़ करता है की पेमेंट सिर्फ कार्ड होल्डर द्वारा ही की जा रही है और उसके द्वारा वेरिफ़िएड है। आम भाषा में कहें तो यह आपके द्वारा की जा रही ऑनलाइन पेमेंट को सिक्योर बनाने का काम करता है। इसे आप OTP की तरह ही मान सकते है, फर्क सिर्फ यह है की हर बार यह एक सा ही रहता है।

CVV कोड कितनी तरह का होता है – CVV code kitni tarah ka hota hai

CVV कोड दो तरह का हो सकता है:

CVV1 और CVV2

CVV1: CVV1 कोड कार्ड प्रेजेंट ट्रांसक्शन जैसे की स्वाइप करने पर या मशीन से पैसे निकलवाने पर इस्तेमाल होता है। यह कोड हमे दिखाई नहीं देता और कार्ड के पीछे ऊपर की बनी ब्लैक मैग्नेटिक स्ट्रिप में एम्बेड होता है। जब आप किसी स्वीपिंग मशीन या एटीएम में कार्ड का इस्तेमाल करते है तो यह कोड कार्ड होल्डर या अकाउंट होल्डर से जुड़ा डाटा उसे प्रोवाइड करवाता है।

CVV2: यह कोड कार्ड नॉट प्रेजेंट ट्रांसक्शन यानि की जहाँ पर कार्ड को स्वाइप करने की जरुरत नहीं होती वहां इस्तेमाल होता है, जैसे की ऑनलाइन पेमेंट, रिचार्ज आदि। यह कोड कार्ड पर छिपा होता है और आसानी से देखा जा सकता है। जब कभी भी हम कोई ऑनलाइन ट्रांसक्शन करते है तो इस कोड को भरने की भी जरुरत होती है। यह कार्ड होल्डर्स की फ्रॉड और illigal activity से सुरक्षा करता है।

CVV कोड पहली बार कब इस्तेमाल किया गया था – CVV code pehli baar kab istemaal kiya gaya tha

CVV कोड का अविष्कार 1995 में यूनाइटेड किंगडम के Michael Stone ने किया था। शुरू में यह सिर्फ एक कांसेप्ट के तौर पर इस्तेमाल किया गया था जिसका काम कार्ड ट्रांसक्शन को सुरक्षित बनाना था लेकिन बाद में इसे व्यापक तौर पर इस्तेमाल किया जाने लगा। जब यह शुरू में इस्तेमाल किये गए थे तो तब यह 11 अंको के होते थे लेकिन बाद में इसे 3 या 4 अंको तक ही सिमित कर दिया गया।

CVV कोड कैसे काम करता है – CVV code kaise kaam karta hai

जैसा की पहले ही बताया गया है की CVV कोड डेबिट या क्रैडिट कार्ड के पीछे छिपा 3 या 4 चार नंबर का कोड होता है। OTP के विपरीत जो की एक रैंडम passcode होता है CVV कोड में बैंक और यूजर से जुड़े डाटा के कॉम्बिनेशन से बनता है जिसका इस्तेमाल ट्रांसक्शन को वेरीफाई करने के लिए किया जाता है। CVV कोड को जेनेरेट करने के लिए बैंक, इनफार्मेशन जैसे की अकाउंट नंबर, एक्सपायरी डेट, DES (डाटा एन्क्रिप्शन सर्विस) आदि का इस्तेमाल करता है।

जब कभी भी हम कार्ड को एटीएम मशीन में स्वाइप करते है तो डाटा मशीन की मैग्नेटिक स्ट्रिप द्वारा पड़ा जाता है और तब जाकर ट्रांसक्शन पूरी होती है वहीँ दूसरी और जब ऑनलाइन पेमेंट के समय manually CVV कोड भरा जाता है तब भी डाटा या कार्ड होल्डर से जुडी जरुरी जानकारी पेमेंट गेटवे द्वारा वेरीफाई की जाती है और फिर ट्रांसक्शन पूरी हो पाती है।

डेबिट और क्रेडिट कार्ड आमतौर पर पेमेंट प्रोसेस करने के लिए वर्चुअल पेमेंट गेटवे जैसे की Strip, Justpay, Razorpay आदि का इस्तेमाल करते है। RBI की इंट्रक्शन अनुसार यह गेटवे कार्ड का CVV कोड स्टोर नहीं कर सकते। मतलब की हर बार जब आप ऑनलाइन पेमेंट करेंगे तो आपको CVV कोड भरना ही पड़ेगा। ऐसी स्तिथि में फ्रॉड की सम्भावना बहुत कम हो जाती है क्युकी कार्ड से जुडी जरुरी डिटेल ना होने में कारण किसी इल्लीगल काम में मुश्किल आती है।

डेबिट/क्रेडिट कार्ड में CVV कोड कहाँ होता है – Debit/Credit card me CVV code kahan hota hai

CVV कोड आमतौर पर पर क्रेडिट और डेबिट कार्ड के पीछे छपा होता है। Visa, Master और Discover कार्ड के केस में यह तीन नंबर का होता है वहीँ American express कार्ड के केस में यह चार नंबर का होता है कार्ड के फ्रंट के छपा होता है।

CVV कोड क्यों जरुरी है – CVV code kyu jaruri hai

क्रेडिट या डेबिट कार्ड द्वारा की जा रही सभी ऑनलाइन ट्रांसक्शन के लिए CVV कोड की जरुरत होती है। इस कोड का इस्तेमाल ऑनलाइन ट्रांसक्शन को सिक्योर बनाने और जरुरी डाटा को स्टोर करने के लिए होता है जिस से फ्रॉड या ठगी की सम्भावना काफी कम हो जाती है। यह इस बात की तस्दीक करता है की जो भी व्यक्ति पेमेंट करने के लिए इस कार्ड का इस्तेमाल कर रहा है उसके पास यह कार्ड physically तौर पर मौजूद है। इस तरह से यह कार्ड होल्डर के authantic होने का भी प्रमाण देता है।

CVV कोड के नुकसान – CVV code ke nuksaan

CVV कोड कार्ड पर physically छपा होता है इसलिए इसे हर किसी के छुपा के रखना मुश्किल होता है। अगर आपका कार्ड चोरी या गुम हो जाता है तो CVV कोड के डाटा को भी एक्सेस किया जा सकता है। CVV कोड के लिए आपके पास फिजिकल कार्ड का होना होना जरुरी है। इसके इलावा अगर किसी के पास कार्ड नहीं भी है तो वह कार्ड की फोटो के जरिये इसका पता लगा सकता है और कोड का गलत इस्तेमाल कर सकता है। CVV1 कोड कार्ड की मैग्नेटि स्ट्रिप पर एम्बेड होता है। अगर वह स्ट्रिप खराब होती है या उसपर कोई नुक्सान होता है तो आपका डेबिट या क्रेडिट कार्ड एरर शो कर सकता है।

यह भी जानिए: NACH full form in hindi – NACH क्या है? क्यों और कहाँ इस्तेमाल होता है

CVV कोड से जुड़े कुछ जरुरी टिप्स – CVV code se jruri kuch jaruri tips

क्युकी डेबिट कार्ड पिन की तरह CVV कोड आपकी पेमेंट से जुड़ा होता है इसलिए इसे लेकर भी सावधानी बरतने की जरुरत है। गलत हाथो में पड़ जाने पर यह फॉर्ड और पैसो के नुक्सान का कारण भी बन सकती है। आईये जानते CVV के उपयोग से जुड़े कुछ टिप्स जो आपको फ्राड से बचने में मदद कर सकते है।

  • कोशिश करे की कार्ड का CVV कोड किसी भी शेयर ना हो। कार्ड की फोटो लेने या इसका किसी संदेहजनक साइट पर प्रयोग करने से बचे।
  • किसी भी तरह की पेमेंट कार्ड द्वारा करने के लिए हमेशा सेफ और ट्रस्टेड वेबसाइट और app का ही प्रयोग करे। किसी भी तरह के सस्पेक्टेड लिंक या मेसेज पर क्लिक करने से बचे।
  • नियमित रूप से अपनी बैंक स्टेटमेंट चेक करते रहे और अगर कोई संदेहजनक ट्रांसक्शन मिले तो उसे तुरंत रिपोर्ट करे।
  • कोशिश करे की CVV की कोड को आप याद रख सके। अगर कोड आपको याद हो जाता है तो डेबिट या क्रेडिट कार्ड से इसे मिटा दे।
  • कार्ड के खो जाने की स्तिथि में उसे तुरंत ब्लॉक् करवा दे।
  • यदि कोई भी व्यक्ति मेसेज, इ मेल या किसी अन्य माध्यम द्वारा आपके CVV कोड को जानने की कोशिश करे तो उसे वेरीफाई करने के बाद ही कोई भी डिटेल शेयर करे।

निष्कर्ष – Conclusion

UPI और डिजिटल पेमेंट के इस युग में ऑनलाइन पेमेंट करना बहुत ही आसान हो गया है। इन सुविधाओं के साथ साथ ऑनलाइन फ्रॉड्स के केस में भी बढ़ोतरी हुयी है। CVV, OTP और पिन जैसी चीजे आपके पैसो को सुरक्षित रखने के लिहाज से ही इस्तेमाल में लायी गयी है। इस आर्टिकल के माध्यम से हमने आपके सामने CVV कोड से जुडी सभी जरुरी जानकारी को सामने रखने की कोशिश की है और उम्मीद है की इसने आपको एक financially जागरूक नागरिक बनाने में और मदद की होगी। अगर आपकी ऐसे ही किसी और बैंकिंग कांसेप्ट के बारे में जानकारी चाहिए तो आप हमसे कमेंट सेक्शन में पूछ सकते है।

Liked our Content? Spread a word!

Leave a Comment