Surcharge meaning in Hindi – जानिए सरचार्ज क्या होता है, और इनकम टैक्स में इसका क्या महत्व है

सरचार्ज, एक ऐसा शब्द है जो हम अक्सर सुनते हैं, खासकर जब बात टैक्सेशन और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की होती है। यह एक एक्स्ट्रा चार्ज होता है जो मुख्यता किसी टैक्स या प्राइस के ऊपर लगाया जाता है। लेकिन ये असल में है क्या? और इसे क्यों लगाया जाता है? ’Surcharge meaning in Hindi’ आज के इस ब्लॉग आर्टिकल में हम इसी बात को विस्तार से जानने की कोशिश करेंगे।

Surcharge meaning in Hindi
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सरचार्ज क्या होता है – Surcharge meaning in Hindi

सरचार्ज, यानी की वह अतिरिक्त चार्ज जो किसी प्रोडक्ट या सर्विस के प्राइस के ऊपर अलग से लगाया जाता है। इनकम टैक्स के केस में सरचार्ज, पहले से बनी टैक्स की देनदारी पर अतिरिक्त चार्ज के रूप में लगाया जाता है। यह एक्स्ट्रा चार्ज कई कारणों से लगाया जाता है, जैसे सरकार को ज्यादा रेवेन्यू सोर्स की जरूरत होने पर, या फिर किसी निश्चित स्कीम की फंडिंग आदि के लिए।

यहां हम यह कह सकते है की सरचार्ज इनकम टैक्स का ही एक भाग है, लेकिन इन दोनो के बीच के फर्क और संबध को भी जान लेना जरूरी है। इनकम टैक्स वह जरूरी टैक्स है, जो सरकार द्वारा लोगो, बिजनेस, प्रॉपर्टी आदि द्वारा हुई इनकम पर लगाया जाता है। वहीं सरचार्ज एक अलग तरह का चार्ज है, जो इनकम टैक्स की रकम पर अलग से एप्लीकेबल होता है।

उदाहरण के लिए अगर आपका कुल इनकम टैक्स 1 लाख है, और उसपर सरचार्ज की पर्सेंटेज 10% है, तो आपको इनकम टैक्स पर अलग से 10 हजार सरचार्ज देना होगा। यानी की आपकी इनकम टैक्स की कुल देनदारी हो जायेगी 1 लाख 10 हजार रुपए। 1970 में भारत सरकार ने पहली बार सरचार्ज का उपयोग किया था, जब सरकार को ज्यादा रेवेन्यू की जरूरत थी। तब से आज तक इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स और कई और सर्विसेज पर सरचार्ज को वसूला जाता है।

सरचार्ज कितनी तरह का होता है – Surcharge kitni tarah ka hota hai

सरचार्ज के मुख्य प्रकार नीचे दर्शाए गए है:

इनकम टैक्स सरचार्ज: जैसा कि पहले बताया गया है, इनकम टैक्स सरचार्ज, इनकम टैक्स की अमाउंट पर लगाया जाता है। यह टैक्स आमतौर पर ज्यादा इनकम कमाने वाले लोगो को टारगेट करता है, ताकि सभी लोगो के बीच पैसे का बराबर डिस्ट्रीब्यूशन किया जा सके और सोसाइटी में इनकम की असमानता कम हो।

फ्यूल सरचार्ज: इस तरह का सरचार्ज एयरलाइंस या ट्रांसपोर्ट कंपनियों द्वारा तब लगाया जाता है, जब फ्यूल के दाम ज्यादा बढ़ जाते है। इस तरह वह कम्पनी अपने रेवेन्यू से फ्यूल के अतिरिक्त खर्चे के बोझ को कम कर सकती है।

सर्विस: इस तरह का सरचार्ज रेस्टोरेंट या अन्य सर्विस देने वालो कामों में लिया जाता है, जिसमे प्रोडक्ट जैसे की खाने के इलावा भी उसे परोसने और अन्य सर्विस देने के खर्चे शामिल किए जाते है।

एनवायरमेंट सरचार्ज: ऐसी इंडस्ट्री जिनके कामों के कारण वातावरण दूषित होता है, उनसे इस तरह का सरचार्ज वसूला जाता है। यह एक तरह की रोकथाम का काम करता है, जिससे इन इंडस्ट्री के ज्यादा प्रदूषण करने पर रोक लगाई जा सके।

सरचार्ज का महत्व – Surcharge ka mahatav

अतिरिक्त रेवेन्यू का सोर्स: जब कभी भी सरकार को देश कल्याण के कामों के लिए ज्यादा फंड की जरूरत पड़ती है, तो इसे वह सरचार्ज के जरिए जुटा सकती है। इस तरह सरचार्ज सरकार के लिए रेवेन्यू के एक अतिरिक्त सोर्स काम करती है, जिससे उसे अपने जरूरी कामों के लिए फंड इक्ट्ठा करने में मदद मिलती है।

वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन: इनकम टैक्स की रिटर्न में सरचार्ज सिर्फ उन लोगो पर पर लगाया जाता है, उनकी इनकम एक लिमिट से ज्यादा होती है। सरचार्ज की दर हर इनकम स्लैब के अनुसार अलग अलग हो सकती है। ज्यादा इनकम वाले लोगो से सरचार्ज को वसूलना देश में वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन, यानी की सभी को समान इनकम का लाभ देने में मदद करता है। साथ ही इससे इक्ट्ठा हुआ पैसा देशहित के कामों और समाज कल्याण स्कीम में किया जाता है।

सेक्टर से जुड़ी फंडिंग: कई बार सरचार्ज सिर्फ एक सेक्टर या सर्विस से जुड़े कामों के लिए लगाया जाता है। यानी की इससे इक्ट्ठा हुए फंड का इस्तेमाल बस उसी उद्देश्य के लिए किया जाता है, जिसके लिए उसे शुरू किया गया था। जैसे की खेतीबाड़ी से जुड़ा सरचार्ज, जिसका इस्तेमाल किसानों की आमदन और उनको फाइनेंशियली सपोर्ट करने के लिए चलाई जा रही स्कीम में किया जाता है।

इनकम टैक्स में कितना सरचार्ज लगता है – Income Tax me kitna surcharge lagta hai

भारत में इनकम टैक्स पर सरचार्ज उच्च इनकम ग्रुप के लोगो से लिया जाता है और सरचार्ज के रेट पर समय समय पर बदलाव होते रहे है। वर्तमान काल में सरचार्ज के नियम और दरें नीचे बताई गई है:

  • वह लोग जिनकी सालाना इनकम 50 लाख से ज्यादा होती है, उनकी इनकम पर सरचार्ज लगाया जाता है।
  • 50 लाख से 1 करोड़ की इनकम पर 10% सरचार्ज लगता है।
  • 1 करोड़ से 2 करोड़ की इनकम पर 15% सरचार्ज एप्लिकेबल होता है।
  • 2 करोड़ से 5 करोड़ की इनकम पर 25% सरचार्ज लगता है।
  • 5 करोड़ से ज्यादा की इनकम पर 37% सरचार्ज लगाया जाता है।
  • नई टैक्स रेजीम के अंतर्गत 5 करोड़ से ज्यादा की इनकम को छोड़कर सभी तरह का सरचार्ज रेट पुराना ही है। सिर्फ 5 करोड़ से ज्यादा की इनकम पर 37% के बजाए 25% सरचार्ज लागू होता है।

सरचार्ज कैसे कैलकुलेट करें – Surcharge kaise calculate karen

सरचार्ज की कैलकुलेशन करना ज्यादा मुश्किल नही है, और इसे आसानी से कैलकुलेट किया जा सकता है। चलिए इसे नीचे दिए उदाहरण की मदद से समझते है:

मान लिए अरुण की सालाना इनकम 70 लाख है। उनकी इनकम 30% के टैक्स स्लैब में आती है, अगर हम इसकी कैलकुलेशन नई टैक्स रेजीम के अंतर्गत करे, तो कुल टैक्स बनता है, 17,37,500/- । 50 लाख से 1 करोड़ की इनकम पर 10% सरचार्ज लगता है इसलिए 17,37,500/- की इनकम पर 10% के हिसाब से सरचार्ज बना, 1,73,750/-. इस हिसाब से टैक्स की कुल देनदारी, जिसमे सरचार्ज भी शामिल होता है, होगी 17,37,500/- +1,73,750/- = 19,11,250/

सरचार्ज पर Marginal Relief क्या है – Surcharge par Marginal Relief kya hai

मार्जिनल रिलीफ का कॉन्सेप्ट उन लोगो के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है, जिनकी इनकम सेट की गई सरचार्ज लिमिट के बहुत करीब या आसपास होती है। यह इस बात की पुष्टि करता है की इनकम में थोड़े से बदलाव या बढ़ोतरी के कारण लोगो पर अतिरिक्त सरचार्ज का बोझ ना पड़े। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्सपेयर्स को ज्यादा सरचार्ज के कारण होने वाले इनकम से नुकसान से बचाना होता है।

इसी कांसेप्ट को चलिए इस उदाहरण के माध्यम से समझते है:

मान लीजिए किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 50 लाख 1 हजार रुपए है। अब क्युकी 50 लाख से ज्यादा की इनकम सरचार्ज के दायरे में आती है, इस कारण उसे इस पर सरचार्ज भरना पड़ता है। यहां पर मार्जिनल रिलीफ इस बात की पुष्टि करता है, की इनकम में सिर्फ 1 हजार की बढ़ोतरी से उसपे लगने वाला सरचार्ज जरूरत से ज्यादा ना हो। कैलकुलेशन की बात करे तो:

50 लाख की इनकम पर लागू टैक्स: 11,37,800/-

इनकम में बढ़ोतरी: 1,000

50 लाख से इनकम ज्यादा होने पर 10% लागू सरचार्ज: 1,13,780/-

50 लाख 1 हजार की इनकम पर एप्लिकेबल टैक्स + सरचार्ज: 11,37,800/- + 1,13,780/- = 12,51,580/-

मार्जिनल रिलीफ के तहत बनता टैक्स: 12,51,580/–1,12,780/- = 11,38,800/-

इस तरह हम यह कह सकते है, मार्जिनल रिलीफ के कारण इनकम में हुई थोड़ी सी बढ़ोतरी के कारण किसी को ज्यादा टैक्स का बोझ नहीं उठाना पड़ता। ऊपर दिए उदाहरण में व्यक्ति की इनकम में हुए सिर्फ 1,000 की बढ़ोतरी के कारण 1,13,780/- रुपए तक का ज्यादा टैक्स भरना पड़ सकता था, लेकिन मार्जिनल रिलीफ के कारण उसकी टैक्स देनदारी को काफी हद तक कम कर दिया गया।

यह भी जानिए: Indexation meaning in hindi – इंडेक्सेशन क्या है और हमारे लिए कैसे फायदेमंद है?

निष्कर्ष – Conclusion

सरचार्ज एक जरूरी फाइनेंशियल टूल है, को सरकार को ज्यादा रेवेन्यू इक्ट्ठा करने और समाज में इकोनॉमिक समानता बनाए रखने में मदद करता है। सभी टैक्सपेयर को इसके बारे में जानकारी होना जरूरी हो जाता है, क्युकी यह उनकी फाइनेंशियल और टैक्स प्लानिंग में बहुत मदद कर सकता है। चाहे वह किसी भी तरह का सरचार्ज क्यों ना हो, किसी ना किसी तरह से वह सरकार और आम लोगो की मदद करता ही है।

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