Types of tax in India? – भारत में कितने प्रकार के टैक्स है?

किसी भी देश इकॉनमी को चलाने और सरकार को अपने काम काज के लिए फण्ड की जरुरत होती है। इस फण्ड को जुटाने का एक मुख्य सोर्स टैक्स होते है। सरकार द्वारा लोगो और बिजनेस की आमदन पर लगाए जाने वाले चार्ज को टैक्स कहते है। टैक्स सरकार की आमदन का मुख्य साधन है और इनको लगाने के पीछे का मुख्य कारण सरकार द्वारा लोगो के हित में किए जाने वाले कामों जैसे की इंफ्रास्ट्रक्चर, एजुकेशन, डिफेन्स आदि के लिए धन जुटाना है। टैक्स की दर एक देश से दूसरे देश में अलग अलग होती है। कई टैक्स इनकम पर लगाए जाते है जबकि कुछ प्रोडक्ट और सर्विसेज पर। आज के इस आर्टिकल Types of tax in India में हम टैक्स की सभी कैटेगरी बारे में विस्तार से जानेंगे।

Bharat me kitne prakar ke tax hai?

भारत में मुख्यता दो तरह के टैक्स वसूले जाते है, Direct Tax और Indirect Tax.

Direct Tax क्या होता है? – Direct Tax kya hota hai?

जैसा की नाम से ही जाहिर है, इस तरह के टैक्स जो बिजनेस और बिजनेस से जुड़े लोग सीधे सरकार को अदा करते है उन्हें direct tax कहते है। The Central Board of Direct Taxes इस की देख रेख के लिए जिम्मेवार है। जिस किसी भी इंसान या उद्योग पर यह टैक्स लागु होता है, वह इसकी भरपाई के लिए पूरी तरह से जिम्मेवार होते है और इसे ट्रान्सफर नहीं किया जा सकता। डायरेक्ट टैक्स में कई तरह के टैक्स शामिल होते है जिसके बारे में निचे बताया गया है:

Income Tax: इनकम टैक्स को पहली बार इनकम टैक्स एक्ट 1961 में लागु किया गया था। इनकम टैक्स हर तरह की आमदन जो सैलरी, मुनाफा, इन्वेस्टमेंट या प्रॉपर्टी से एक financial year में होती है, पर लागु होता है। इनकम टैक्स एक्ट में कई तरह के ऐसे नियम है जिनमे इस टैक्स की पर छूट या रिबेट ली जा सकती है। जैसे की सेक्शन 80C जिसके अंडर कई तरह की इन्वेस्टमेंट सेविंग्स आती है, में डेढ लाख तक की रिबेट मिलती है। ऐसे ही सैलरी लेने वाले नागरिक एडवांस टैक्स, TDS आदि में भी रिबेट ले सकते है। भारत में जिन लोगो की इनकम 5 लाख से ज्यादा है वह इनकम टैक्स के दायरे में आते है। टैक्स रेट की प्रतिशत इस बात की निर्भर करता है की टैक्सपेयर किस टैक्स ब्रैकेट में आते है। भारत में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स का ब्रैकेट 30% का है।

Wealth Tax: 1957 भारत सरकार ने वेल्थ टैक्स को लागु किया था जो अमीर सोसाइटी के लोगो से वसूला जाता था लेकिन 2015 के financial बजट में इसे वापिस ले लिया गया। इसकी जगह high net worth लोगो, HUF(Hindu undivided family) और कॉर्पोरेट्स की इनकम पर 12% सरचार्ज लिया जाने लगा। HNI में वह लोग आते है जिनकी इनकम 1 करोड़ से ज्यादा और वह बिज़नेस जिनकी इनकम 10 करोड़ से ज्यादा हो।

Corporate Tax: भारत में कॉर्पोरेट टैक्स कंपनियों और उद्योगों द्वारा कमाए गए मुनाफे पर लगाया जाता है। घरेलू कंपनियों द्वारा यह टैक्स सभी तरह की इनकम जो उन्होंने देश से या विदेश से होती है, पर देना होता है जबकि विदेशी कंपनियों को यह टैक्स सिर्फ उस इनकम पर देना पड़ता जो उन्होंने भारत में कमाई हो। वह पब्लिक और प्राइवेट कंपनिया जो कम्पनीज एक्ट 1956 के अंडर रजिस्टर्ड है को यह टैक्स देना जरुरी होता है। घरेलू कम्पनीज के टर्नओवर के अनुसार इस टैक्स की दर 25% से 30% के बीच हो सकती है जिसपर 7 से 12% का सरचार्ज भी लागु होता है। विदेशी कंपनी के मामले में टैक्स की दर 40% है।

Capital gains Tax: कैपिटल गेन टैक्स, कैपिटल एसेट जैसे की रियल एस्टेट,सिक्योरिटीज,स्टॉक्स आदि की बिक्री से कमाए गए मुनाफे पर लिया जाने वाला टैक्स है। एसेट के प्रकार और होल्डिंग टाइम के आधार पर टैक्स की दर अलग अलग होती है। कैपिटल गेन्स टैक्स दो तरह के हो सकते है: Long Term Capital Gains Tax और Short Term Capital Gains Tax।

Short Term Capital Gain में वह मुनाफा आता है जो किसी एसेट को एक फिक्स्ड टाइम पीरियड के अंदर बेचने से मिलता है। जैसे की इक्विटी स्टॉक्स जो खरीद के 1 साल के अंदर बेचे गए हो। डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड, रियल एस्टेट प्रॉपर्टी और सोना जो 3 साल के अंदर बेचा गया हो। अगर एसेट को ऊपर बताये गए टाइम पीरियड के बाद बेचा गया हो तो Long Term Capital Gain की कैटेगरी में आता है। एसेट के प्रकार के आधार पर आप long Term Capital Gains पर indexation का फायदा ले सकते है। indexation आपको आपके कैपिटल गेन्स में inflation का फायदा लेने देता है जिस से टैक्स की देनदारी कम हो जाती है।

Securities transaction Tax: STT शेयर बाजार की सिक्योरिटीज की लेनदेन पर लगाया जाने वाला टैक्स है। यह टैक्स भारत में किसी स्टॉक एक्सचेंज में होने वाली स्टॉक और बॉन्ड जैसी सिक्योरिटीज की बेच या खरीद पर लगाया जाता है। यह टैक्स स्टॉक एक्सचेंज द्वारा इकठा किया जाता है और आगे सरकार को सौंप दिया जाता है। STT की दर लेनदेन के किस्म और ट्रेड की जा रही सिक्योरिटी के आधार पर अलग अलग होती है। STT का उद्देश्य सरकार के रेवेनुए में बढ़ोतरी करना और शेयर बाजार में चल रहे टैक्स से बचने के तरीको पर रोक लगाना है।

Dividend distribution Tax: DDT एक कंपनी द्वारा अपने शेयरहोल्डर्स को दिए जाने प्रॉफिट के हिस्से या डिविडेंड पर लगाया जाने वाला टैक्स है। DTT की कैलकुलेशन कंपनी द्वारा दिए गए टोटल डिविडेंड के प्रतिशत के रूप में की जाती है। भारत में वर्तमान DTT दर 15% है। कंपनी DTT का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार है, लेकिन शेयरहोल्डर्स को अपने इनकम टैक्स रिटर्न में, मिले डिविडेंड को भी रिपोर्ट करना जरुरी होता है।

Indirect Tax क्या होता है? – Indirect Tax kya hota hai?

जहाँ direct tax इनकम और वेल्थ पर लगाए जाते है वहीँ indirect tax प्रोडक्ट और सर्विस पर लगाए जाते है। भारत में कई तरह से indirect टैक्स लिए जाते है। हालाँकि GST के लागु होने के बाद कई सारे indirect टैक्स को एक ही टैक्स के दायरे में डाल दिया गया। इस से पहले की हम GST की बात करे, आईये जान लेते है indirect taxes के बारे में:

Value Added Tax (VAT): VAT उन प्रोडक्ट्स की बिक्री पर लगाया जाता है जो देश में एक हिस्से से दूसरे हिस्में में कारोबार के लिए ले जाई जाती है। VAT प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल के सभी चरणों में लगाया जाता है जिसमें प्रोडक्ट के वैल्यू में इजाफा होता है। यह टैक्स स्टेट सरकार द्वारा 54 राज्यों की में वसूला जाता है।

Central Excise Duty: यह टैक्स हर उस प्रोडक्ट पर लागु होता है जो भारत में बनायीं जाती है। यह टैक्स प्रोडक्ट के निर्माता द्वारा भरा जाता है जो असल में प्रोडक्ट की कीमत में समाहित होता है और कस्टमर्स से वसूला जाता है।

Service Tax: सर्विस टैक्स उन बिज़नेस द्वारा चार्ज किया जाता है जो सर्विस इंडस्ट्री जैसे की counselling, legal आदि में काम करती है। यह टैक्स सर्विस लेने वालो से वसूला जाता है और आगे सरकार के पास डिपाजिट कर दिया जाता है। जून 2016 से सर्विस टैक्स की दर 15% है जिसमे स्वच्छ भारत सेस 0.5% और कृषि कल्याण सेस 0.5% शामिल है।

Customs Duty: जब कोई प्रोडक्ट विदशो से इम्पोर्ट करके भारत में लाया जाता है जो उस पर लगने वाले टैक्स को कस्टम ड्यूटी कहते है। कुछ केस में यह टैक्स एक्सपोर्ट की जाने वाले प्रोडक्ट्स पर भी लगाया जाता है।

Stamp Duty: यह टैक्स भारत में किसी भी अचल प्रॉपर्टी की सेल या ट्रांसफर पर लगाया जाता है। जिस राज्य सरकार के दायरे में प्रॉपर्टी होती वह इस टैक्स को वसूल करती है।

Entertainment Tax: राज्य सरकार ऐसा टैक्स मनोरंजन से सम्भंतित लेनदेन से वसूलती है। जैसे की फिल्म के टिकेट, स्टेज शो, exhibtion, खेल से संभंतित इवेंट आदि।

Good and Services Tax(GST) क्या होता है? – GST kya hota hai?

GST 1 जुलाई, 2017 को लागू हुआ था और इसने कई सरे indirect tax जैसे की VAT, service tax, excise duty आदि को समाहित कर लिया। यह एक तरह से पूरे देश के लिए एक सिंगल indirect tax है, जो केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए कई सरे टैक्स की जगह ले ली है। ये टैक्स एक प्रोडक्ट या सर्विस की हर value addition पर लगता है और अलग अलग प्रोडक्ट और सर्विसेज के लिए इसकी दर अलग हो सकती है। भारत में GST की एवरेज दर 12 से 18% है जो बाकि देशो से काफी कम है। GST मुख्यता चार तरह के होते है:

CGST (Central Goods and Services Tax): यह टैक्स केंद्रीय सरकार द्वारा कलेक्ट किया जाता है।

SGST (State Goods and Services Tax): यह टैक्स राज्य सरकार द्वारा कलेक्ट किया जाता है।

IGST (Integrated Goods and Services Tax): यह टैक्स केंद्र सरकार द्वारा माल और सेवाओं की एक राज्य के भीतर हो रही आपूर्ति पर कलेक्ट किया जाता है।

यह भी जानिए: Mutual Fund par kitna tax lagta hai? – म्यूच्यूअल फण्ड रिटर्न पर टैक्स। कितना कब और कैसे? पूरी जानकारी।

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